21 साल के नौजवान की जिंदादिली लोगों के लिए मिसाल बन गई। मां-बाप ने अपने बेटे के अंगदान कराकर 3 लोगों को नई जिंदगी दी। पंजाब के सूरज ने इस दुनिया से विदा लेने से पहले तीन लोगों को नई जिंदगी दी है। सूरज एक एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। करीब सात दिन तक वे पीजीआई में दाखिल रहे। कोई रिस्पांस नहीं मिलने पर उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। आर्गन डोनेशन की स्वीकृति मिलने के बाद उनके तीन अंग जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर किए गए।
इससे तीन मरीजों को नई जिंदगी मिली। ये मरीज मौत के मुहाने पर थे। पीजीआई के मुताबिक पंजाब के मालेरकोटला का 21 वर्षीय सूरज 28 अप्रैल को अपने दोस्त के साथ दोपहिया वाहन से जा रहा था। रास्ते में कार से टक्कर हो गई। सूरज के सिर पर गंभीर चोटें लगीं। उसे पटियाला के राजिंदरा हास्पिटल में दाखिल कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे 29 अप्रैल को पीजीआई रेफर कर दिया गया। 1 मई को उसे पीजीआई के आईसीयू में एडमिट किया गया।
एक्सीडेंट के बाद से वह कोमा में चला गया था। उसके बाद उसके ब्रेन में कोई हलचल नहीं हुई। पांच दिन तक वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा। डाक्टरों ने भी पूरी कोशिश की, लेकिन सूरज ने कोई रिस्पांस नहीं किया। आखिरकार डॉक्टरों ने उसे 5 मई को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। उससे पहले पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने सूरज के परिजनों से बात करके आर्गन डोनेशन के बारे में बातचीत की। उन्हें समझाया कि सूरज की वापसी अब मुश्किल है।
उसके आर्गन उन मरीजों के काम आ सकते हैं, जिनकी जिंदगी काफी मुश्किल से बीत रही। सूरज के पिता राम अवतार ने आर्गन डोनेशन के महत्व को समझा और एक बड़ा फैसला लेते हुए आर्गन डोनेट करने की मंजूरी दे दी।
ये अंग किए गए ट्रांसप्लांट
जांच के दौरान सूरज की दोनों किडनी, लिवर और पेनक्रियाज ठीक थे। एक मरीज में किडनी और पेनक्रियाज एक साथ ट्रांसप्लांट किए गए, जबकि लिवर और एक अन्य किडनी अलग-अलग मरीजों में ट्रांसप्लांट हुए। हार्ट का कोई मैचिंग मरीज नहीं मिला। कोर्निया के लिए परिजनों ने स्वीकृति नहीं दी थी।
नहीं पहना था हेल्मेट
पीजीआई के डाक्टरों ने बताया कि एक्सीडेंट के दौरान सूरज ने हेल्मेट नहीं पहना था। इससे उसके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। सिर में चोट लगने से वह कोमा में चला गया था। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि सूरज ने हेल्मेट पहना होता तो उसे सिर पर गंभीर चोटें नहीं आतीं। एक्सीडेंट के दौरान सिर पर चोट लगने से ही अधिकतर लोगों की मौत होती है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों को हेल्मेट जरूर पहनना चाहिए।
डोनर फैमिली के साहस को बयां नहीं किया जा सकता। ऐसे वक्त में जब उन्होंने अपने बेटे को खो दिया और उस दौरान इस तरह के फैसले लेना अपने आप में एक मिसाल है। ट्रांसप्लांटेड पेशेंट ठीक हैं।
- डा. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो पीजीआई
आर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ी है। लोग इसके महत्व को समझने लगे हैं। इसके बावजूद अभी लंबा सफर तय करना है। डोनर फैमिली के एक बड़े फैसले की वजह से ही तीन लोगों को नई जिंदगी मिली है। ऐसे में उन्हें सलाम तो बनता है।
- प्रो. एके गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट पीजीआई