पीजीआई में सिर्फ पक्के कर्मचारी ही परेशान नहीं हैं, बल्कि कांट्रेक्ट पर लगे कर्मियों का भी शोषण किया जा रहा है।
कांट्रेक्ट लेबर को न तो बोनस मिलता और न ही अतिरिक्त छुट्टी। कांट्रेक्ट लेबर को रविवार का वेतन नहीं मिलता। ठेकेदारों का कहना है कि जब पीजीआई में काम नहीं हुआ तो वेतन किस काम का।
कांट्रेक्ट लेबर को महीने में मात्र 26 दिन का वेतन दिया जाता है। उनसे पक्के कर्मचारियों से ज्यादा काम लिया जाता है। कर्मचारियों पर पहले से ही काम का दबाव है और वेतन भी कम मिलता है।
इससे कांट्रेक्ट कर्मचारियों में रोष है। अधिकतर कर्मचारी तनाव में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे पक्के कर्मचारियों से ज्यादा काम कर रहे हैं, लेकिन वेतन आधा है।
पीजीआई में इस समय अलग-अलग विभागों में पांच हजार से ज्यादा कांट्रेक्ट लेबर काम कर रहे हैं।