चंडीगढ़ की ‘सखी’ ने छह सालों में 117 महिलाओं का टूटा हुआ घर जोड़ा है। यह महिलाएं घरेलू हिंसा, गृह क्लेश और वैवाहिक समस्याओं से जूझ रहीं थीं। वर्ष 2019 में सबसे ज्यादा ऐसे 60 मामले आए। 2020 में अभी तक 4 मामले आए, जिनमें 3 हिंसा प्रभावित महिलाओं को आश्रय दिया जा चुका है।
बता दें कि अक्टूबर 2015 में सेक्टर- 7 स्थित नारी निकेतन में सखी वन स्टॉप सेंटर का शुभारंभ किया गया था। यहां पर महिलाओं को सुरक्षा, चिकित्सा, पुलिस, परामर्श, कानूनी और आश्रय (5 दिनों के लिए) दिया जाता है। केंद्र सरकार के द्वारा इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही छत के नीचे निजी और सार्वजनिक स्थानों में एकीकृत समर्थन और सहायता प्रदान करना है।
चंडीगढ़ में सखी ने कुछ ऐसा ही किया है। छह सालों में 117 महिला हिंसा के मामले आए, जिनको सखी ने काउंसिलिंग या अन्य विभागों के जरिए उनकी समस्याओं का समाधान कराया और अपनों से मिलाने का कार्य किया। यहां के कर्मचारी और अधिकारी भी इस कार्य को कर खुशी महसूस कर रहे हैं।
छह सालों का विवरण
वर्ष हिंसा की शिकार महिलाएं
2015 03
2016 08
2017 03
2018 39
2019 60
2020 04
इन केसों में की जाती है मदद
सखी में 25 महिला हिंसा के मामलों में मदद की जाती है। इनमें घरेलू हिंसा, वैवाहिक समस्या, घर छोड़ कर भागी महिलाएं, पारिवारिक कलह, शारीरिक शोषण, बलात्कार, शोषण, पोस्को, बाल विवाह, गुमशुदगी, अपहरण, आर्थिक फ्रॉड, तलाक आदि शामिल हैं।
इन परिस्थितियों में मिल सकती है मदद
- आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव सेवाएं
- चिकित्सकीय सहायता के लिए
- एफआईआर, डीडीआर दर्ज कराने में सहायता
- मानसिक रोगी के लिए सामाजिक सहयोग
- कानूनी समस्याओं के लिए सहायता
- अल्प समय के लिए आश्रय
- महिलाओं के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा
एक छत के नीचे मिलता है इंसाफ
सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को एक छत के नीचे ही इंसाफ दिलाना है। 2015 से अब तक चंडीगढ़ में 117 महिला हिंसा के मामले प्रकाश में आए थे। यह महिलाएं घरों से छोड़ी हुई, गृह क्लेश, वैवाहिक दिक्कतों से परेशान थीं। सखी के माध्यम से इनके टूटे हुए घरों को जोड़ने का कार्य किया गया है। इसमें समाज कल्याण विभाग, पुलिस, न्यायालय, स्वास्थ्य विभाग का भी सहयोग लिया गया।
- शीनू शर्मा वशिष्ठ, प्रभारी, सखी केंद्र, चंडीगढ़