चंडीगढ़। हरियाणा के कैथल निवासी 20 साल के साहिल ने दुनिया से जाते हुए भी चार लोगों की जिंदगी में खुशियां बिखेरी हैं। 10 मार्च को सड़क दुर्घटना में घायल होने पर साहिल को सिर में आई गंभीर चोट के कारण निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से 10 मार्च को ही पीजीआई रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने इलाज के दौरान 13 मार्च को साहिल को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों की सहमति से साहिल का अंगदान कराया गया। अंगदान में मिले हृदय को ग्रीन कॉरिडोर से चेन्नई भेजा गया, जबकि दोनों कॉर्निया और एक किडनी पीजीआई में पंजीकृत तीन मरीजों को प्रत्यारोपित किया गया।
पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अंगदाता परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि साहिल के परिवार की ओर से किया गया दान परोपकारिता के गहरे प्रभाव और त्रासदी को जीवन के अवसर में बदलने की ताकत का प्रमाण है। प्रो. विवेक का कहना है कि अपने ही परिवार के सदस्य की दुखद मृत्यु के बीच, कुछ अजनबियों की जान बचाने के बारे में सोचना अप्रत्याशित और अकल्पनीय है। उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं हैं।
पिता ने कहा, अंगदान से मिली सांत्वना
पिता का कहना है कि अपने बेटे के अंगों को दान कर इस बात की सांत्वना मिली है कि उससे दूसरों को जीवन का नया मौका मिलेगा। हमने ऐसा इसलिए किया है ताकि हमारा बेटा दूसरों के माध्यम से जीवित रहे। हम अंगदान करने वाले लोगों को यह एहसास कराने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं कि मृत्यु चीजों का अंत नहीं है, लोग दूसरों के माध्यम से जीवित रह सकते हैं।