फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: कुत्तों में लगेंगी माइक्रोचिप, रंग-ब्रीड से स्टरलाइजेशन तक जान सकेंगे

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। शहर में कुत्तों की समस्या काफी बड़ी है। रोजाना कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आती हैं। अक्सर लोग और पार्षद स्टरलाइजेशन को लेकर सवाल उठाते हैं। ऐसे में नगर निगम अब एक ऐसी परियोजना पर काम कर रहा है, जिसमें तुरंत लावारिस कुत्ते का रंग, ब्रीड, एरिया, कब-कब स्टरलाइजेशन हुआ आदि की जानकारी मिल जाएगी। इसके लिए कुत्तों के अंदर माइक्रोचिप लगाया जाएगा। जल्द ही इसे लेकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।कुत्तों के अंदर माइक्रोचिप विदेशों में काफी सामान्य है। यह माइक्रोचिप एक छोटी इलेक्ट्रॉनिक चिप होती है। यह चावल के दाने के आकार की होती है और आमतौर पर कुत्ते के कंधे के पास ढीली त्वचा के नीचे इंजेक्ट की जाती है। इसमें कोई बैटरी या आंतरिक पावर सोर्स नहीं होता। यह आरएफआईडी है, जिसे स्कैन करते ही इसके अंदर फीड की गई सारी जानकारी कंप्यूटर की स्क्रीन पर आ जाती है। इसके लिए नगर निगम का एमओएच विभाग एक निजी कंपनी के साथ काम कर रहा है। नगर निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने भी हाल ही में हुए सदन की बैठक में इसका जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि इस पर तेजी से काम चल रहा है। स्टरलाइजेशन को लेकर अकसर पार्षदों की शिकायत रहती है। इसके लागू होने के बाद यह दूर हो जाएगी। कुत्ते की सभी तरह की जानकारी उस माइक्रोचिप के अंदर होगी। कोई भी जानकारी के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता क्योंकि इसमें जानकारी सिर्फ यूनिक आईडी के माध्यम से मैनुअल ही डाली जाएगी। विभाग ने अंदाजा लगाया है कि एक कुत्ते के अंदर चिप लगाने का खर्च शुरुआत में 100 से 150 रुपये तक आएगा। एक सेक्टर में इसको पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा। अगर यह सफल रहता है तो बाकी शहर में लागू किया जाएगा।
विज्ञापन


सफल रहा तो पालतू कुत्तों के लिए माइक्रोचिप हो सकता है अनिवार्य
शहर में बहुत से लोगों ने कुत्ते पाले हुए हैं। नगर निगम के अधिकारियों की शिकायत रहती है कि जब कुत्ता अपनी उम्र पूरी करने वाला होता है तो कई लोगों द्वारा कुत्ते को सड़क पर छोड़ दिया जाता है। वह नगर निगम की जिम्मेदारी बन जाते हैं। इस वजह से भी शहर में हर साल कुत्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है। एमओएच डॉ विनय मोहन सिंह ने बताया कि अगर कुत्ते के अंदर माइक्रोचिप होगी तो स्कैन करने पर उसके मालिक का नाम, नंबर, पता समेत सभी तरह की जानकारी मिल जाएगा। ऐसे में इस समस्या से भी निजात मिल सकती है। इसका लाभ कुत्ते के खोने पर भी मिलता है। अगर वे कभी लापता हो जाते हैं तो उन्हें जल्द से जल्द ढूंढने और सुरक्षित रूप से मालिक के पास लौटने में भी सहायता होती है। स्कैन करते ही तुरंत पता लग जाएगा कि कुत्ता किसका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें