स्वर्गीय सत संगत सिंह की आत्मकथा सफरनामा का विमोचन
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‘यादां भी जिंदगी दा सरमाया हुंदियां हन, इहनां नूं भुल्ल जाणा अपणे अतीत नूं भुल्लणा है।’ यह पंक्ति पंजाब कला भवन के लाउंज में रिलीज हुई स्वर्गीय सत संगत सिंह की आत्मकथा सफरनामा की है।
इस समारोह का आयोजन पंजाब आर्ट्स काउंसिल और स्व. सत संगत सिंह के पुत्र कंवलपाल सिंह ने किया। इसमें पंजाब आर्ट्स काउंसिल की चेयरपर्सन हरजिंदर कौर विशेष मेहमान और मशहूर लेखक जसबीर भुल्लर गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर मौजूद रहे।
कंवलपाल सिंह ने बताया कि उनके पिता सत संगत सिंह रेलवे में गार्ड थे। इसीलिए पुस्तक के कवर पर भी रेल का इंजन बना हुआ है। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक पिता जी के जीवन के एक भाग का वर्णन करती है, अन्य दो भाग भी जल्द ही रिलीज किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि 1986 में रिटायरमेंट केबाद सत संगत ने पहली पुस्तक कसक लिखी थी, जिसमें काल्पनिक कहानियां थीं। उसकेबाद उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और 1996 में आत्मकथा लिखनी शुरू की। इसकेअलावा उन्हें पेंटिंग में भी दिलचस्पी थी।