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बजट सत्र: पंजाब विधानसभा में गूंजा मुख्तार अंसारी का मुद्दा, मजीठिया ने पूछा- अंसारी का बचाव क्यों

Wed, 03 Mar 2021 12:50 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करते अकाली विधायक। - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन बुधवार को शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने अपनी बात रखने के लिए समय न दिए जाने के विरोध में नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया। इससे पहले अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने मुख्तार अंसारी और नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने एससी स्कॉलरशिप मामले में सरकार पर निशाना साधा।

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शून्यकाल के दौरान मजीठिया ने कहा कि ऐसी स्थिति बन रही है कि कर्मचारियों को वेतन, भत्ते और टीए-डीए नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने पीयू में वेतन न मिलने के कारण एक माली द्वारा आत्महत्या करने का मामला भी उठाया। मजीठिया ने अंडरवर्ल्ड डॉन मुख्तार अंसारी मामले में पूछा कि सरकार ने उसे स्टेट गेस्ट क्यों बना रखा है? इससे पहले आप विधायक हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि एससी स्कॉलरशिप का मामला चार साल से लंबित है। 

उन्होंने आरटीआई के तहत मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने यह स्कीम बंद नहीं की है और पंजाब सरकार को केंद्र से 2020-21 के लिए 200 करोड़ 74 लाख रुपये मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार केंद्र से मिले एससी स्कॉलरशिप के पैसे को अन्य मदों में खर्च कर रही है।
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इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा शून्यकाल समाप्त होने का एलान करने पर अकाली दल के सदस्यों ने उनसे और समय दिए जाने की मांग की लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के लिए सदस्य का नाम पुकारा तो अकाली दल और आप के सदस्य वेल में पहुंच गए और समय नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए नारेबाजी करने लगे। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

खैर के पेड़ों की नीलामी पर उलझे चीमा और विधानसभा अध्यक्ष
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने मानकपुर, जोकि विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह के विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, में पुलिस द्वारा खैर के 931 पेड़ बेचे जाने के मामले में आरोप लगाया कि दो करोड़ रुपये की यह लकड़ी पुलिस अफसरों ने मात्र 40 लाख रुपये में बेच दी। उन्होंने यह भी कहा कि खैर के पेड़ खरीदने के लिए कई लोगों ने ज्यादा बोली भी लगाई थी लेकिन पुलिस अफसरों ने उनकी बोली स्वीकार न करते हुए सारी लकड़ी 40 लाख में बेच दी। 

इस पर विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह ने चीमा से कहा कि अगर कोई 60 लाख भी दे तो मैं सरकार से नीलामी रद्द करने को कहूंगा। इस पर चीमा ने कहा कि 55 लाख रुपये में खरीदने की मांग आई थी। स्पीकर ने कहा अभी आप दो करोड़ रुपये की बात कह रहे थे। अगर इन पेड़ों के 60 लाख रुपये भी दिला दें तो वे तुरंत सरकार से आग्रह करूंगा कि इस मामले में हुई नीलामी रद्द कर दी जाए। इस पर चीमा कोई जवाब नहीं दे सके।

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