चंडीगढ़। नगर निगम के गठन के साल से ही भाजपा और शिअद का गठबंधन रहा। अब किसानों के मुद्दों पर गठबंधन टूट गया है। दोनों ही दलों के रास्ते अलग हो गए हैं। 8 जनवरी को महापौर, वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर चुनाव में पहली बार शिरोमणि अकाली दल (शिअद) बहिष्कार करेगा। शिअद किसी भी दल के मेयर पद के उम्मीदवार के लिए वोट नहीं करेगा।
हालांकि, बहिष्कार के बाद भाजपा को इसका असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि बहुमत से भी बहुत अधिक संख्या भाजपा पार्षदों की है। नगर निगम में शिअद का एक मात्र पार्षद है। शिअद चंडीगढ़ इकाई के प्रधान और पार्षद हरदीप सिंह बुटेरला का कहना है कि पहली बार नगर निगम के मेयर के चुनाव में भाग नहीं लेंगे। भाजपा के साथ पार्टी का गठबंधन था। अब टूट गया है। भाजपा से अलग हो गए हैं और कांग्रेस को वोट नहीं दे सकते हैं, ऐसे में बहिष्कार की करेंगे। नगर निगम गठन के समय से ही शिअद का भाजपा के साथ गठबंधन रहा। शिअद ने कभी चार सीटों पर जीत हासिल की थी। पिछले नगर निगम के आम चुनाव में केवल एक ही सीट से शिअद को संतोष करना पड़ा था।
महापौर, वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख चार जनवरी तय की गई है। पांच जनवरी को नामांकन की जांच होगी। चुनाव के लिए मनोनीत पार्षद अजय दत्ता को प्रीजाइडिंग अधिकारी बनाया गया है। चुनाव के समय से पहले तक नाम वापस लिया जा सकता है। चुनाव में 26 पार्षद और एक सांसद की मतदान में हिस्सेदारी होगी। मनोनीत पार्षद मतदान में हिस्सा नहीं ले सकते हैं। भाजपा के 20, शिअद का एक और कांग्रेस के पांच पार्षद हैं। महापौर के चुनाव में किसी के विरोध करने का भाजपा पर किसी भी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा।