फेज-8 स्थित विकास भवन के बाहर बुधवार को रूरल हेल्थ फार्मासिस्टों ने धरना दिया। ग्रामीण विकास विभाग के डायरेक्टर दफ्तर के बाहर दिए गए धरने में पंजाब भर से आए फार्मासिस्ट शामिल हुए। धरने के बाद प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़ की ओर मार्च निकाला। लेकिन गीता भवन के पास चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने वहीं बैठकर धरना दिया और सीएम कार्यालय से आए अधिकारियों को उन्होंने अपना मांग पत्र साैंपा।
रूरल हैल्थ फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रधान कुलराज सिंह ने बताया कि जून 2006 में ग्रामीण डिस्पेंसरियों संबंधी बनी पॉलिसी के तहत पिछले आठ सालों से फार्मासिस्ट कम वेतन पर काम करते आ रहे हैं। सरकार द्वारा मई 2011 में उनके साथ काम करते डाक्टरों को पक्का कर दिया गया, परंतु उनकी सेवाओं को रेगुलर करने के लिए टालमटोल की नीति अपनाई जा रही है।
धरने के दौरान फार्मासिस्टों ने सरकार को चेतावनी दी की 13 जनवरी तक उनकी मांगों का हल न निकाला गया, तो 14 जनवरी को पंजाब की 1186 ग्रामीण डिस्पेंसरियों में काम करने वाले फार्मासिस्टों और दर्जा चार कर्मचारी अपने परिवार समेत सरकार की कांफ्रेस में रोष प्रदर्शन करेगें। इस मौके पर राम सिंह आलोवाल, रूपिंदर राजा, विक्रजीत सिंह, नवदीप बठिंडा, हरपाल मानसा, स्वरत शर्मा और रणजीत कौर ने भी धरने को संबोधित किया।