खेल के मामले में नियमों की अनदेखी का आलम देखिए। इंडोर गेम को आउटडोर में करा दिया, नतीजा खिलाड़ियों के पांव जल गए। कई बच्चों के पैरों में छाले भी पड़ गए। बता दें कि शिक्षा विभाग ने पंचकूला सेक्टर-19 के गवर्नमेंट हाई स्कूल में जिला ताइक्वांडो चैंपियनशिप का आयोजन करवाया गया था।
इसमें जिले के करीब 80 फीसदी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के स्टूडेंट्स हिस्सा लेने पहुंचे थे। लेकिन इस गेम्स में विभाग वर्ल्ड ताइक्वांडो फेडरेशन के नियमों को भूल गया। नतीजन इसका खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ा। रबर के बने एरीना पर उनके पाव जलते रहे। लेकिन विभाग ने सुध तक नहीं लिया। अब सवाल ये है कि अगर ये गेम्स इनडोर का है तो आउट डोर में क्यों करवाया गया।
बच्चों के विरोध के बाद दूसरी जगह गेम्स शिफ्ट
सुबह करीब नौ बजे ताइक्वांडो गेम्स शुरू किया गया। लेकिन जैसे धूप गरमाता गया बच्चों की हालत बिगड़ती गई। जब बच्चों से तेज धूप बर्दास्त नहीं हुआ और एरीमा पर पाव जलने लगे तो स्कूली बच्चों ने अपने कोच को बताया और गेम्स का विरोध शुरू हो गया। उसके बाद गेम्स को दूसरी जगह शिफ्ट करवाया गया। लेकिन फिर भी खिलाड़ियों को राहत नहीं मिली।
विजेताओं को स्टेट, नेशनल व वर्ल्ड स्कूल में मिलेगा मौका
जिला चैंपियनशिप खिलाड़ियों के लिए वो पड़ाव है, जहां से स्टेट, स्कूल नेशनल व वल्र्ड स्कूल जैसे गेम्स प्रतियोगिता का हिस्सा बनने का रास्ता खुल जाता है। लेकिन अगर ऐसे ही लापरवाही होती रही तो बच्चों को मनोबल टूटेगा और स्टेट, स्कूल नेशनल व वर्ल्ड स्कूल जैसे गेम्स में मौका मिलने के बाद भी वह बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। इसका ताजा उदाहरण रिओ ओलंपिक है।
हमारे पास इन डोर हॉल नहीं है। विभाग को किसी भी स्कूल ने इन डोर हाल मुहैया नहीं कराया। मीटिंग में सबके सहमति के बाद गेम्स आउटडोर में करवाया गया है। विभाग के पास टेक्निकल स्टाफ की भी कमी है।
- ओम प्रकाश एईओ, जिला शिक्षा विभाग पंचकूला
इस गेम्स में नियम फॉलो नहीं किए जा रहे हैं। पहले तो ये गेम्स इन डोर में कराया जाना चाहिए। वहीं बच्चों के वेट भी गेम्स के दिन लिए जा रहे हैं। जबकि नियम के मुताबिक गेम्स के एक दिन पहले बच्चों का वेट होना चाहिए।
- राजकुमार यादव, जनरल सेक्रेटरी जिला ताइक्वांडो एसोसिएशन
ताइक्वांडो गेम्स आउट डोर में होने की वजह से बच्चों के पांव धूप में जले हैं। कई बच्चों के पैर लाल हो गए थे। वे चल नहीं पा रहे थे।
- धर्मेंद्र सिंह, कोच पंचकूला