मुक्तसर में बिना मास्क डाकघर में काम करते कर्मचारी।
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हाल ही में जालंधर जिला प्रशासन ने बच्चों को किताबें व स्टेशनरी मुहैया करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन बिक्री व होम डिलीवरी की इजाजत दी थी। इजाजत के बावजूद दुकानदार लोगों तक किताबें पहुंचा नहीं पा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जालंधर में जो सबसे बड़ी किताबों की मार्केट है, वह माईं हीरा गेट में है।
माईं हीरा गेट के साथ लगते मिठ्ठा बाजार को जिला प्रशासन ने रेड जोन में रखा है। अब मिठ्ठा बाजार रेड जोन में होने व किताब मार्केट, मिठ्ठा बाजार के बेहद करीब होने के कारण पुलिस का इस रोड पर हर पल पहरा रहता है। अगर कोई दुकानदार दुकान खोलता है तो पुलिस दुकान बंद करवा देती है।अब अगर दुकानदार दुकानें ही खोल नहीं पाएंगे तो किताबों की होम डिलीवरी कैसे कर पाएंगे।
पुलिस प्रशासन दुकानदारों को मुहैया करवाएगा पास: दीपक जोशी
इस बारे में माईं हीरा गेट बुक मार्केट के प्रधान दीपक जोशी का कहना है उनकी पुलिस प्रशासन से बात हुई है। प्रशासन माईं हीरा गेट स्थित किताबों की दुकानें चलाने वाले दुकानदारों को कर्फ्यू पास मुहैया करवा रहा है। कुछ दुकानदारों के पास बन गए हैं व बाकी के भी जल्द ही बनकर आ जाएंगे। कर्फ्यू पास के बाद दुकानदार दुकान पर जाकर आर्डर के हिसाब से किताबें या स्टेशनरी लेकर सप्लाई कर सकते हैं। दुकान पर किताबें या अन्य सामान बेचने की इजाजत नहीं है।
उधर माईं हीरा गेट में किरण बुक डिपों के मालिक किरण आनंद का कहना है कि अभी तक मुश्किल हो रही है। अगर कोई दुकानदार किताबें लेने दुकान पर आता है तो पुलिस दुकानें बंद करवा देती है। उसका दोपहिया वाहन कब्जे में ले लिया जाता है। पुलिस-प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से दुकानदारों के पास जारी करे ताकि दुकानदार बच्चों तक किताबें पहुंचा सकें।
मुक्तसर के मुख्य डाकघर में कर्फ्यू और सामाजिक दूरी के नियमों का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। डाकघर स्टाफ न तो सोशल डिस्टेंस का ध्यान रख रहा है और न ही पोस्ट मास्टर समेत अन्य मुलाजिमों ने मास्क लगाए हुए हैं। डाकघर में काम करवाने पहुंच रहे लोग भी परेशान हो रहे हैं। महिला व पुरुष रुपये जमा करवाने, निकलवाने, एफडी व अन्य कामों के संबंध सिर्फ एक ही लाइन लगे हैं।
सोमवार को डाकघर के गेट पर सुबह से ही लंबी कतार लग गई। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा। यही नहीं वहां मौजूद पोस्टमास्टर बलबीर सिंह समेत कई मुलाजिमों ने मास्क तक नहीं लगाए हुए थे। सभी कामों के लिए एक ही लाइन लगी होने से लोग घंटों कतार में खड़े रहे। जब लोगों ने पोस्टमास्टर से कारण पूछा तो उनका जवाब था कि अभी बैंक से रुपये नहीं आए हैं। जब आएंगे तब दे सकेंगे। इस पर जब किसी उपभोक्ता ने कहा कि जो लोग रुपये जमा करवाने आएं हैं, उनके रुपये तो जमा कर सकते हो।
इतने में पोस्टमास्टर भड़क गए और लोगों को डाकघर से बाहर निकालने की धमकियां देने लगे। इस पर हंगामा हो गया। अतिरिक्त चार्ज संभाले हुए पोस्टमास्टर बलबीर सिंह ने खुद मास्क न पहनने पर कहा कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ है, इसलिए वो मास्क नहीं पहन सकते। सरकार ने तीन लोगों के स्टाफ को काम करने के लिए कहा है लेकिन तीन लोग सारा काम कैसे संभाल सकते हैं।
हाईडल नहर के किनारे झुग्गियों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों ने नंगल नगर काउंसिल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने राशन न मिलने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पहले तो उन्हे एसडीएम कार्यालय में राशन देने के लिए बुलाया गया। बाद में बिना राशन दिए उन्हें वापस भेज दिया गया। गुस्साए लोगों ने मौके पर उपस्थित कुछ लोगों पर महिलाओं के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया।
एसडीएम कार्यालय से वापस आकर इन गरीब प्रवासी मजदूरों ने अपनी बस्ती के समक्ष धरना देकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन करने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक थी। धरने की सूचना मिलते ही मौके पर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर पवन चौधरी, सब इंसपेक्टर राहुल शर्मा के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने इन लोगों को समझा बुझाकर अपने-अपने घर भेजा।
वहीं नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी मनजिंदर सिंह का कहना है कि इन लोगों को राशन लेने के लिए बुलाया गया था। भीड़ ज्यादा होने के कारण उन्हें लौटा दिया गया। उन्होंने या किसी भी कर्मचारी ने महिलाओं से अभद्रता नहीं की। दूसरी तरफ थाना प्रभारी इंसपेक्टर पवन चौधरी का कहना है कि सूचना मिलते ही वह तुरंत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। चंद ही मिनटों में सभी गुस्साए लोगों को घर भेज दिया गया था। इन लोगों के एक प्रतिनिधि मंडल की एसडीएम के साथ एक बैठक भी हुई। इसके बाद पूरा मामला शांत हो गया।