अंबाला रोड स्थित एक मेटरनिटी अस्पताल में हुई डिलीवरी के दो दिन बाद बच्चे की मौत पर परिजन भड़क उठे। परिजनों ने अस्पताल के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शन कर ताला जड़ दिया। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत करवाया।
प्रताप गेट के चंद्र गंभीर ने बताया कि उसकी पत्नी दीरू गंभीर का नौ माह से अंबाला रोड स्थित गर्ग आई एंड मेटरनिटी होम में इलाज चल रहा था। यहां दोनों चिकित्सकों ने 21 सितंबर की डेट डिलीवरी के लिए दी थी लेकिन डॉक्टरों ने 17 सितंबर को फोन कर उन्हें बुलाया गया था।
यहां आने पर चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें विदेश जाना है, इसीलिए डिलीवरी आज ही कर देते हैं। इसके बाद उसकी पत्नी को दर्द की दवा देकर डिलीवरी कर दी गई और वेक्यूम प्रेशर के साथ जब बच्चे को खींचा गया तो उसके ब्रेन पर असर हुआ।
इस कारण बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हुई। बावजूद इसके डॉक्टर ने किसी भी बाल रोग विशेषज्ञ को नहीं बुलाया। बच्चे का बिना कोई चेकअप किए तीन घंटे बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद बच्चे को ढांड रोड स्थित बाल रोग विशेषज्ञ के अस्पताल में लेकर गए तो उन्होंने बच्चे का इलाज करने से पहले ही फीस जमा करवा ली और बच्चे का गंभीरता से इलाज न कर उसे ठीक बताकर वहां से भेज दिया।
अगले दिन सुबह बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और जब वे चिकित्सक के पास आए तो उन्होंने बच्चे की गंभीर हालत होने पर उसे कुरुक्षेत्र रेफर कर दिया। जब वे उसे एक निजी अस्पताल में लेकर गए तो वहां बच्चे की मौत हो गई।
परिजन तरुण गंभीर, सरोज, संतोष, सुमित, विनोद, अशोक व प्रतीक ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे की मौत चिकित्सकों की लापरवाही से हुई है। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
समझौता हो गया
शहर थाना प्रभारी रामफल गोयत ने बताया कि बच्चे की मौत के मामले को लेकर वे मौके पर गए थे। दोनों पक्षों को थाने में बुलाया गया था। दोनों पक्षों में आपसी बातचीत के बाद समझौता हो गया है।