कोच रोशनी देवी महाबीर स्टेडियम में जूनियर व सब-जूनियर टीम को अभ्यास कराती हैं।
किसी महिला को मौका मिले तो वह बहुत कुछ कर सकती है। इस बात को सार्थक कर दिखाया है भारत की पहली एनआईएस डिप्लोमा होल्डर और कुश्ती कोच रोशनी देवी ने। आज से करीब 23 साल पहले जब समाज में महिलाओं के खेलने को लेकर कोई सोचता भी नहीं था। तब गांव बांढ़ाहेड़ी की रोशनी देवी ने जूडो के माध्यम खेल की दुनिया में कदम रख कर जता दिया था कि महिलाएं भी पुरुषों से कम नहीं है। वे महाबीर स्टेडियम में पिछले दो साल से बतौर कोच जूनियर महिला पहलवानों को तराश रहीं हैं। महाबीर स्टेडियम में कुश्ती का क, ख, ग सीखने वाली जूनियर महिला पहलवानों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर एक के बाद एक स्वर्ण पदक जीतकर साबित कर दिया है कि उनकी कोच रोशनी देवी ने उन्हें बेहद करीने से तराशा है।
कोच रोशनी देवी महाबीर स्टेडियम में जूनियर व सब-जूनियर टीम को अभ्यास कराती हैं। इनमें 12 वर्ष से लेकर 18 वर्ष तक के करीब 50 पहलवान हैं, जिनमें आधी से अधिक लड़कियां हैं। इसी साल जनवरी में हुई सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में विभिन्न भार वर्गों में उनकी शिष्या मनीषा, अंजू, अंकुश ने गोल्ड मेडल तो वहीं अंजू पंघाल ने कांस्य और मोनिका ने रजत पदक जीता था। इसके अलावा हाल ही में तेलंगाना में हुई पायका सब-जूनियर प्रतियोगिता में भी उनकी पहलवान शिष्या मनीषा और सोनिका ने गोल्ड मेडल हासिल किया था।
भारत की पहली महिला एनआईएस डिप्लोमा होल्डर
रोशनी देवी भारत की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से डिप्लोमा प्राप्त किया था। कुश्ती का कोच बनने के लिए यह डिप्लोमा हासिल करना जरूरी होता है। रोशनी देवी ने यह डिप्लोमा पटियाला खेल संस्थान से 2002 में ही हासिल कर लिया था।