फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

द्रोणाचार्य बन महिला पहलवानों को तराश रहीं रोशनी देवी

Mon, 07 Mar 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार।

सार

  • इनमें 12 वर्ष से लेकर 18 वर्ष तक के करीब 50 पहलवान हैं, जिनमें आधी से अधिक लड़कियां हैं।
  • इसी साल जनवरी में हुई सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में विभिन्न भार वर्गों में उनकी शिष्या मनीषा, अंजू, अंकुश ने गोल्ड मेडल तो वहीं अंजू पंघाल ने कांस्य और मोनिका ने रजत पदक जीता था।
विज्ञापन
कोच रोशनी देवी महाबीर स्टेडियम में जूनियर व सब-जूनियर टीम को अभ्यास कराती हैं।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

किसी महिला को मौका मिले तो वह बहुत कुछ कर सकती है। इस बात को सार्थक कर दिखाया है भारत की पहली एनआईएस डिप्लोमा होल्डर और कुश्ती कोच रोशनी देवी ने। आज से करीब 23 साल पहले जब समाज में महिलाओं के खेलने को लेकर कोई सोचता भी नहीं था। तब गांव बांढ़ाहेड़ी की रोशनी देवी ने जूडो के माध्यम खेल की दुनिया में कदम रख कर जता दिया था कि महिलाएं भी पुरुषों से कम नहीं है। वे महाबीर स्टेडियम में पिछले दो साल से बतौर कोच जूनियर महिला पहलवानों को तराश रहीं हैं। महाबीर स्टेडियम में कुश्ती का क, ख, ग सीखने वाली जूनियर महिला पहलवानों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर एक के बाद एक स्वर्ण पदक जीतकर साबित कर दिया है कि उनकी कोच रोशनी देवी ने उन्हें बेहद करीने से तराशा है।
विज्ञापन


कोच रोशनी देवी महाबीर स्टेडियम में जूनियर व सब-जूनियर टीम को अभ्यास कराती हैं। इनमें 12 वर्ष से लेकर 18 वर्ष तक के करीब 50 पहलवान हैं, जिनमें आधी से अधिक लड़कियां हैं। इसी साल जनवरी में हुई सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में विभिन्न भार वर्गों में उनकी शिष्या मनीषा, अंजू, अंकुश ने गोल्ड मेडल तो वहीं अंजू पंघाल ने कांस्य और मोनिका ने रजत पदक जीता था। इसके अलावा हाल ही में तेलंगाना में हुई पायका सब-जूनियर प्रतियोगिता में भी उनकी पहलवान शिष्या मनीषा और सोनिका ने गोल्ड मेडल हासिल किया था।

भारत की पहली महिला एनआईएस डिप्लोमा होल्डर
रोशनी देवी भारत की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से डिप्लोमा प्राप्त किया था। कुश्ती का कोच बनने के लिए यह डिप्लोमा हासिल करना जरूरी होता है। रोशनी देवी ने यह डिप्लोमा पटियाला खेल संस्थान से 2002 में ही हासिल कर लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

मेरी बेटियां खेलें ओलंपिक

रोशनी देवी - फोटो : amarujala
कोच रोशनी देवी अपनी दो बेटियों को रोजाना स्टेडियम में अपने साथ लेकर जाती हैं। चाहती हैं कि उनकी बेटियां ओलंपिक में खेलने की उनकी इच्छा पूरी करें और गोल्ड जीतें। उन्होंने बताया कि मेरी कोई भी शिष्य ओलंपिक में खिताब जीत लेगी तो वे अपनी जीवन को सफल मान लेंगी।

जूडो से की शुरुआत
रोशनी देवी ने खेलने की शुरुआत वर्ष 1993 में जूडो से की थी। जूडो में कई राष्ट्रीय पदक जीतने के बाद 1997 में बड़े भाई व आर्मी में कुश्ती कोच सूबेदार बलवंत सिंह ने कुश्ती खेलने के लिए प्रेरित किया। तब तक रोशनी सीनियर नेशनल जूडो प्रतियोगिता में तीन गोल्ड जीत चुकी थीं। भाई बलवंत के कहने पर रोशनी ने जूडो छोड़कर कुश्ती खेलना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने सीनियर नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में एक के बाद एक पांच गोल्ड मेडल जीते। 2002 में मंगोलिया में हुई सीनियर एशियन चैंपियनशिप में रोशनी को डिस्क की समस्या होने के बाद उन्होंने कुश्ती खेलना छोड़ दिया।

स्टेडियम जाना नहीं छोड़ा
रोशनी को अपने खेल से इतना लगाव हो गया था कि कुश्ती छोड़ने के बाद भी उसने स्टेडियम जाना नहीं छोड़ा और अपने भतीजे जसबीर को साथ ले जाकर प्रेक्टिस करवाने लगी। 2013-14 में हरियाणा सरकार ने रोशनी को महाबीर स्टेडियम के ग्राउंड मैनेजर के तौर पर रख लिया। इसके बाद रोशनी ने 31 जुलाई 2014 को बतौर कुश्ती कोच ज्वाइन  कर लिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें