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गलत काम करते, 3-3 घंटे मुर्गा बनाकर रखते, पीठ पर गहरे जख्म, गुरुकुल के बच्चों ने सुनाई आपबीती

Tue, 28 Aug 2018 01:10 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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stress management
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कपड़े उतारकर डंडे से पीटते हैं, पीठ पर गहरे नीले जख्म हो गए। तीन-तीन घंटे मुर्गा बनाकर रखते, धमकी देते। छात्रों ने रो-रोकर आपबीती सुनाई तो सभी की आंखें नम हो गईं।
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बाल कल्याण समिति के सामने बच्चों ने बयां किया अपना दर्द
रोहतक के गुरुकुल में पांच जूनियर छात्रों के यौन उत्पीड़न मामले की जांच करने के लिए सीडब्ल्यूसी टीम दोपहर दो बजे गुरुकुल पहुंची, लेकिन एक घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। सीडब्ल्यूसी चेयरमैन डा. राज सिंह सांगवान के सख्ती करने पर गुरुकुल संस्थापक से मुलाकात हुई। इसके बाद जांच शुरू हुई।

समिति चेयरमैन ने कक्षाओं में जाकर बच्चों से पूछताछ की। स्कूल के सभी बच्चों से सामूहिक तौर पर पूछताछ व काउंसिलिंग की। इस दौरान कई और बच्चों के साथ यौन शोषण किया जाना सामने आया। उन्हें डंडे से पीटने की बात भी पता चली। इसके बाद पीड़ित बच्चों की अलग से काउंसिलिंग की गई। पीड़ित बच्चों ने कई और बच्चों के साथ यौन शोषण की बात कही है।
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कपड़े उतारकर डंडों से पिटाई करते थे, तीन घंटे बनाया जाता मुर्गा
गुरुकुल में बात-बात पर पिटाई होती है। छोटी-छोटी गलती पर बड़ी मार सहनी पड़ती है। सुबह पांच मिनट देरी से उठने या शाम में एक मिनट देरी से आने पर कपड़े उतार कर पीठ व उससे निचले हिस्स पर बांस के डंडों से मारा जाता है। यह सब आम है। यही नहीं 20-20 डंडे मारने के बाद लॉन में सफाई का काम कराते हैं। बच्चे बोले, मोबाइल फोन साथ नहीं रखने दिया जाता है।

त्योहार पर छुट्टी नहीं दी जाती है। रक्षाबंधन पर घर जाना था, मगर नहीं जा सके। घर पर बात करनी हो तो फोन पर भी मुश्किल से पांच मिनट का ही समय मिल पाता है। सीनियर्स गलत काम करते हैं। इनकी शिकायत भी नहीं कर सकते। शिकायत पेटी नहीं है। शिकायत देनी भी हो तो वार्डन को दे सकते हैं। इस पर कार्रवाई के बजाय पिटाई ही होती है। हमें तीन-तीन घंटे मुर्गा बनाया जाता है।

छात्रों ने दिखाए मारपीट के निशान

बच्चे संग कुकर्म - फोटो : amar ujala
सीडब्ल्यूसी के सामने पीड़ित बच्चों ने उत्पीड़न के बाद शिकायत करने पर दिए गए जख्मों के निशान दिखाए। बच्चों के कमर और निचले हिस्से पर गहरे नीले निशान देख समिति के सदस्य दहल गए।

टीचर व सीनियर मारते हैं, किसी को बताने पर धमकी देते हैं
बच्चों व अभिभावकों ने बताया कि टीचर के साथ सीनियर भी मारते हैं। हमारे साथ गलत काम किया। किसी को बताने पर मारने की धमकी देते हैं। रक्षाबंधन पर यहां तो बच्चों ने हमें इस बारे में बताया। बच्चे रो पड़े। बोले, हमें यहां नहीं रहना। प्रिंसिपल व पुराने वार्डन बच्चों के साथ हुए अन्याय के लिए जिम्मेदार हैं। अब वे बयान बदल रहे हैं।

खाने में बच्चों को मिलती है सादी दाल व कच्ची रोटी
गुरुकुल में बच्चों को यौन प्रताड़ना ही नहीं यहां के प्रशासन की मनमर्जी भी झेलनी पड़ती है। बच्चों के लिए न खाने की बेहतर सुविधा है न दूसरी व्यवस्था। सोमवार दोपहर को बच्चों को उड़द की सादी व पतली सी दाल और रोटी खाने में दी गई। मशीन से निकली अनेक रोटियां कच्ची थी। यह खुलासा सीडबल्यूसी ने किया है। बच्चों ने गुरुकुल की व्यवस्था को लेकर समिति को ये बातें बताई। यही नहीं सीडब्ल्यूसी ने खाने के अलावा दूसरी व्यवस्था भी जांची। इस दौरान ढेरों खामियां नजर आई।

 

गुरुकुल की व्यवस्था बेहद खस्ता

student beat
बाल कल्याण समिति की मानें तो गुरुकुल की व्यवस्था बेहद खस्ता है। कुछ बड़ी खामियां सामने आई हैं। इन्हें दुरुस्त करने की जरूरत है। इसमें पहली कमी सीसीटीवी की है। कक्षाओं में तो सीसीटीवी लगे हैं, मगर हास्टल व अन्य जगह नहीं। शारीरिक दंड मामूली बात पर ज्यादा दिया जाता है। बच्चे अपनी शिकायत नहीं दे सकते हैं। इसके लिए शिकायत पेटी तक नहीं है। वार्डन को शिकायत दे भी दी तो वह दब जाती है। कोई ज्यादा बोले, तो उसकी पिटाई हो जाती है। खाने में दाल-रोटी मिलती है। यह टेस्टलेस होती है। मेडिकल जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।

साल भर से हो रहा बच्चों के साथ गलत काम
अभिभावकों ने कहा कि गुरुकुल में बच्चों के साथ गलत हुआ है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। साल भर से यह सब हो रहा है। प्रशासन जानबूझ कर आंखें बंद किए हुए है। कुछ महीने पहले भी मामला उठा था। शिकायत भी हुई थी। उस समय इसे दबा दिया गया। इस बार भी यही प्रयास किया जा रहा है। गुरुकुल में ऐसे पीडित बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है। इनका मेडिकल कराया जाए। जांच रिपोर्ट में सब सामने आ जाएगा। वहीं यौन उत्पीड़न मामले की जानकारी मिलने के बाद सोमवार सुबह ही अभिभावक अपने बच्चों से मिलने पहुंचना शुरू हो गए। शाम तक करीब 30 से ज्यादा विद्यार्थी गुरुकुल छोड़ चुके थे।

संस्कार सीखने के लिए भेजा था बेटा
पीड़ित छात्रों में से एक की मां ने कहा कि अपने बेटे को संस्कार सीखने के लिए भेजा था। सुना था गुरुकुल में संस्कारों को लेकर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। नहीं पता था कि ऐसे संस्कार मिलेंगे। इससे अच्छा तो बच्चों को किसी सरकारी स्कूल में भेज देते तो भी वे इंसान बनकर निकलते। यहां उनके साथ गलत होता है। उन्हें ही 20-20 डंडे मारे जाते हैं। बच्चों से गलत काम होने के बाद पीटा और पार्क में काम कराया। बच्चों ने कहा कि हमारे घर बात कराओ। मेरा बेटा कभी नहीं रोता। रविवार को आई तो वह गले लग कर रोने लगा। पूछा तो उसने अपने साथ हुए गलत काम के बारे में बताया।

तीन-चार दिन पहले वार्डन से पता लगी शिकायत

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गुरुकुल में पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है। तीन-चार दिन पहले ही इस बारे में पता लगा। वार्डन से घटना का पता लगा। अपने स्तर पर जांच की तो स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। मामला बच्चों का है। आरोप संगीन है। इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। सही स्थिति सामने आए। दोषी को सजा मिले। हम पूरा सहयोग करेंगे। सरकार सजा दे न दे, हम गलत करने वालों को यहां नहीं रखेंगे। आरोपी बच्चों में से एक भाग कर घर चला गया है। उसके अभिभावकों को इस बारे में बता दिया गया है। यहां वे बच्चे आते हैं, जो अभिभावकों के काबू में नहीं होते। वे यहां जम नहीं पाते हैं। उन्हें बीडी, सिगरेट, मोबाइल व साथी याद आते हैं। इसलिए यहां नहीं रहना चाहते।
- हरिदत्त आर्य, संस्थापक, गुरुकुल।

समिति ने सुरक्षा घेरा बनाया तो बच्चों से सुनाया दर्द
समिति ने बच्चों की काउंसिलिंग के जरिए गुरुकुल में हुई घटना का सच जानने का प्रयास किया। इस संबंध में कक्षा 12वीं के बच्चों से पूछा गया तो उन्होंने नो-कमेंट्स लिख कर दिया। कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों की बारी आई तो समिति सदस्यों ने विद्यार्थियों पर गुरुकुल प्रशासन का दबाव होने की आशंका के चलते बच्चों के चारों को अपना सुरक्षा घेरा बना लिया। समिति के सभी सदस्यों ने उन्हें अपने बीच लेकर बेखौफ होकर बोलने के लिए कहा तो बच्चों ने उत्पीड़न किए जाने की बात कही। ये बयान समिति दर्ज कर लिए हैं।

गुरुकुल नहीं कर रहा जांच में सहयोग
समिति चेयरमैन डॉ. राज सिंह सांगवान ने कहा कि गुरुकुल जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। मामला गंभीर है। सभी बच्चों से बातचीत करना, उनके बयान दर्ज करना, बड़ा काम है। गुरुकुल न तो कोई रिकॉर्ड दे रहा है न कोई और सहयोग। सीबीएसई से संबद्ध गुरुकुल में वर्ष 2008 के नियमानुसार काउंसलर नियुक्त किया जाना था। ऐसा यहां नजर नहीं आया है। नियमों के तहत काउंसलर अपना काम नियमित रूप से करे, यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है। काउंसलर को सारा रिकॉर्ड दर्ज करना होता है। यह रिकॉर्ड भी गुरुकुल ने नहीं दिया है। इसके लिए नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस के जरिए जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।

समिति ने गुरुकुल में लगाई कोर्ट
बाल कल्याण समिति ने सोमवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुकुल में ही कोर्ट लगाई। पूरी कमेटी यहीं है। सभी के बयान दर्ज किए गए हैं। पीड़ित, उनके अभिभावक, आरोपी सभी के बयान स्टडी किए जाएंगे। कुछ और बच्चे सामने आए हैं। फिलहाल इस बारे में स्पष्ट तौर पर कहना मुश्किल है। बयान की स्टडी के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। बच्चों को रीहैब्लिटेशन दिया गया है। बच्चा अपराध नहीं करता, गलती करता है। इनके लिए जेजे बोर्ड है। इसी के तहत कार्रवाई होती है। समिति नियमानुसार कार्रवाई कर रही है। यहां से पांच आरोपियों को जेजे बोर्ड के सामने पेश किया गया है।
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मामले मे पुलिस की तुरंत कारवाई

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पुलिस ने गुरुकुल में जूनियर छात्रों के यौन उत्पीड़न के मामले में कारवाई करते हुए वार्डन समेत पांच नाबालिग छात्रों को पकड़ लिया है। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। उत्पीड़न मामले मे कड़ा संज्ञान लेते हुए एक टीम गठित की गई है। उप पुलिस अधीक्षक नारायण चंद के नेतृत्व में टीम को तुंरत मामलें में कारवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। टीम ने त्वरित कारवाई करते हुऐ गुरुकुल के वार्डन सचिन समेत पांच नाबालिग छात्रों को पकड़ लिया है। दादरी के बौंद कला निवासी आरोपी वार्डन सचिन से पूछताछ की जा रही है। वह वर्ष 2012 से 2014 तक गुरुकुल में क्लर्क रहा। इसके बाद सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए अपने घर चला गया। बाद में फिर से उसने 2016 से जून 2018 तक क्लर्क की नौकरी की। स्कूल प्रिसिंपल ने जुलाई महीने में ही आरोपी को मुख्य वार्डन की जिम्मेवारी सौपी थी। गुरुकुल में जाकर अन्य छात्रों व स्टाफ से भी पूछताछ की जाएगी। इस मामले में और किसी के संलिप्त होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- जशनदीप सिंह रंधावा, पुलिस अधीक्षक

ब्लॉक स्तरीय एंटी सेक्सुअल हैरेसमेंट कमेटी करेगी गुरुकुल कांड की जांच  
गुरुकुल में मासूमों के यौन शोषण पर शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर बीईओ ने ब्लॉक स्तरीय एंटी सेक्सुअल हैरेसमेंट कमेटी गठित कर दी है। इसमें चार स्कूलों के प्राचार्य को शामिल किया गया है। सोमवार को जांच करने के आदेश दिए गए। मंगलवार को कमेटी गुरुकुल का दौरा करेगी। जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता रुहिल ने बीईओ को आदेश जारी किया है। बीईओ वीरेंद्र मलिक ने बताया कि मामले की जांच का आदेश ब्लॉक स्तरीय एंटी सेक्सुअल हैरेसमेंट कमेटी को दिया गया। इस तरह का मामला सामने आने पर ही कमेटी संबंधित शिक्षण संस्थान का दौरा करती है। शिकायत आने से पहले कमेटी किसी स्कूल प्रबंधन, शिक्षक या विद्यार्थी से इस विषय में बात नहीं करती। उन्होंने बताया कि कमेटी के सदस्यों को सुबह नौ बजे बीईओ कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं से यह कमेटी बाद में गुरुकुल जाएगी। इस कमेटी में बीईओ के साथ सांघी स्कूल के प्राचार्य जयपाल, लाठौत स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र सांगवान, बालंद स्कूल की प्राचार्या आशा दहिया व करौंथा स्कूल की प्राचार्या विजय बाला को रखा गया है।
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