चंडीगढ़ के युवा ने रूस में देश का डंका बजाया है। रशिया सरकार की रशियन यूथ फेडरेशन एजेंसी की ओर से हर साल नौ लोगों को समाजसेवा के लिए ‘वीआर टूगेदर इंटरनेशनल’ पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाता है। इस कड़ी में वर्ष 2022-23 के लिए देश से एकमात्र धनास निवासी रोहित कुमार को रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ने पुरस्कृत किया है। उन्हें पुरस्कार में ट्रॉफी के साथ एक मिलियन रूबल्स रशियन करेंसी (भारतीय करेंसी 13 लाख) रुपये दिए गए हैं। रोहित ने इसे अपने जीवन का सबसे गर्व का क्षण बताया। उन्होंने बताया कि मंच से नमस्कार किया तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। इस दौरान खुशी से उनकी आंखें नम हो गईं।
रोहित ने बताया कि उनकी संस्था स्वरमणि यूथ वेलफेयर एसोसिएशन प्रशासन, निगम और वन विभाग के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही है। अपने कार्यों की जानकारी देते हुए इसके लिए अगस्त माह में आवेदन किया था। इसके लिए 80 से ज्यादा देशों से 3000 आवेदन आए थे। इन आवेदनों में से 60 संस्थाओं को चिह्नित किया गया और मास्को में सम्मानित करने के लिए बुलाया गया। इन 60 संस्थाओं में से 9 संस्थाओं को विशेष पुरस्कार के लिए चुना गया।
यह पुरस्कार समारोह के दौरान ही मंच से घोषित किया जाता है, जिसमें स्वरमणि यूथ वेलफेयर एसोसिएशन का नाम भी शामिल था। रोहित ने बताया कि इस सम्मान से उनका परिवार और संस्था के सदस्य काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि टीम के सदस्य सीमा, गुरविंदर, सतीश, गोविंद, प्रदीप, गुरप्रीत सिंह, विश्वदिति कालिया ने पूरी मेहनत कर इस पुरस्कार को पाने में सहयोग किया है। साथ ही उन्होंने अपनी गुरु प्रोफेसर रेणु त्रिखा का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणा से ही मुझे हौसला मिला।
यह होती है प्रक्रिया, गुजरात से भी गई थी एक टीम
रोहित ने बताया कि इस पुरस्कार के लिए दुनियाभर से 60 संस्थाओं को चुनने के लिए रशियन यूथ फेडरेशन एजेंसी ने पूरे एशिया में नौ जज बनाए हैं। आवेदन करने वाली संस्थाओं के बारे में यह जज पूरी जानकारी इकट्ठी करते हैं। इसके लिए तीन चरणों में व्यवस्था की जाती है। इसके बाद दुनियाभर से चयनित सामाजिक संस्थाओं को आमंत्रित किया जाता है। इस बार इन संस्थाओं में गुजरात से भी एक टीम गई थी। नौ विशेष पुरस्कार के लिए कार्यक्रम के दौरान ही पूरी समीक्षा होती है और अचानक मंच से नाम बोला जाता है, जिसमें चंडीगढ़ से स्वरमणि वेलफेयर एसोसिएशन को चुना गया।
इन कार्यों को देखकर किया जाता है संस्थाओं का चयन
इस पुरस्कार के लिए रशियन सरकार कई चरणों में संस्था के कार्यों को देखती है। इसमें सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में संस्था की कितनी मदद रही, पर्यावरण को बचाने में संस्था का योगदान, स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति किए गए कार्य, डिजास्टर मैनेजमेंट में योगदान और युवा कल्याण के लिए किए जाने वाले कार्यों को देखा जाता है। रोहित और उनकी टीम ने कोरोना की पहली लहर में कोराना संक्रमित शवों को उठाने का बीड़ा उठाया था। उस समय रेडक्रॉस के कर्मचारियों ने भी काम करने से मना कर दिया था।