पूरे विश्व में विख्यात रॉक गार्डन अभी भी अधूरा है। अभी भी पद्मश्री विजेता शिल्पकार नेक चंद के संजोए सपनों के अनुसार रॉक गार्डन नहीं बन पाया है। उनका सपना था कि वह रॉक गार्डन से सुखना लेक तक एक टॉय ट्रेन का ट्रैक बनाएं। इस पर बच्चों के साथ ही बड़े भी बैठकर शहर और गार्डन का लुत्फ उठा सके।
पाकिस्तान में बनाई थी पहली रोड
पाकिस्तान के बेरियाकलां गांव में जन्मे नेक चंद ने लोक निर्माण विभाग में बतौर रोड इंस्पेक्टर के तौर पर सबसे पहली सड़क पाकिस्तान के जफरबाल से नारोबाल तक बनाई थी। हालांकि इसके तुरंत बाद बंटवारा हो गया और वह भारत चले आए, इस रोड के निर्माण के लिए पहला मेहनताना उन्हें भारत में आकर ही मिला।
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हास्य कलाकार जसपाल भट्टी ने किया था पहला शो
रॉक गार्डन के मुरीद हास्य कलाकार स्वर्गीय जसपाल भट्टी ने अपने कैरियर का पहला शो गार्डन के ओपन एयर थिएटर में ही किया था। यहां पर शो के दौरान चंडीगढ़ के लोगों ने उनकी प्रतिभा को खूब पसंद किया था।
जल भराव न हो इसके लिए एक विशेष यंत्र के जरिए किसी भी भवन का बेसमेंट बनाया जाता है। टॉपोग्राफी का बेहतर नमूना है गार्डन। छोटी कनाल से बड़े पौंड तक पानी पहुंचाने के लिए रॉक गार्डन के निर्माण के दौरान विशेष ख्याल रखा गया है। बारिश के जल भराव को एक विशेष स्थान पर एकत्र किए जाने का प्रबंध किया गया है, जहां से गार्डन के प्रयोग में आने वाले पानी का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक अद्भुत है, ऐसे ही नहीं नेक चंद जी ने गार्डन का निर्माण किया है।
- लखमीर, आर्कीटेक्ट, चंडीगढ़
फेमस होने के लिए नहीं बनाया गार्डन
मैंने इसका निर्माण सिर्फ लोगों के दिल को खुश करने के लिए किया है। यह उत्तर नेक चंद सैनी ने पिलानी (राजस्थान) से बच्चों के आए एक शैक्षिणिक टूर के दौरान पूछे गए सवाल पर दिया था। रॉकगार्डन को मूर्तरूप देने वाले शिल्पकार सैनी का बच्चों से विशेष लगाव था।
हमें भी उनसे बहुत प्यार और दुलार मिला है।
- भारत भूषण त्रेहान, पड़ोसी, चंडीगढ़
गार्डन से लेक तक चलाना चाहते थे टॉय ट्रेन
बाबू जी की एक योजना थी, जो अधूरी रह गई। वह 2011 से रॉकगार्डन से सुखना लेक तक टॉय ट्रेन की योजना पर काम कर रहे थे। इसके लिए उनके द्वारा दिल्ली में कुछ जानकार अधिकारियों से भी वार्ता की गई, लेकिन जब तक वह इस पर क्रियान्वयन कर पाते उनको कैंसर ने पकड़ लिया और वह इस योजना को मूर्त रूप नहीं दे पाए।
- अनुज सैनी, पुत्र, नेक चंद सैनी
नेक चंद को शुरुआत में अपनी इस रचना को बचाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इस बारे में 1975 में जब अधिकारियों को पता चला था तो उन्होंने इसे नष्ट करने की धमकी दी। उनका कहना था कि यह उन कड़े नियोजन कानूनों का उल्लंघन है जो ली कार्बुजिए की सिटी ब्यूटीफुल की रक्षा के लिए बनाए गए थे। जहां यह अनिवार्य था कि हर चीज मास्टर प्लान का हिस्सा होनी चाहिए। नेक चंद फाउंडेशन के अनुसार उस समय कई राजनेताओं ने रॉक गार्डन को अवैध निर्माण बताकर उसे ढहाए जाने की मांग की थी, लेकिन यह उनकी मेहनत और लगन ही थी कि फिर अगले ही साल इसका उद्घाटन किया गया।
- राहुल महाजन, सेक्टर-27 चंडीगढ़
गार्डन नहीं किंगडम बनाया था
रॉक गार्डन को उन्होंने एक किंगडम के रूप में बनाया था। यहां पर एक राजा के दरबार में होने वाली सभी सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। एंट्री से लेकर एग्जिट तक गेट को इसलिए छोटा बनाया गया है जिसमें लोग राजा के दरबार में झुककर आ सकें। गार्डन के कांसेप्ट को अभी लोगों ने नहीं समझा है।
- हर्ष कुमार, पूर्व एससी, रॉक गार्डन
रात भर करते थे काम
गार्डन को बनाने में उन्होंने पूरे समर्पण के साथ काम किया। घर बार को भूलकर वह सिर्फ गार्डन के निर्माण में ही व्यस्त रहे। गार्डन के निर्माण के दौरान उन्होंने अपना पूरा जीवन लगा दिया। हम भी उनके साथ काम करके अपने आप को धन्य महसूस करते हैं।
- अब्दुल, गार्ड, रॉक गार्डन