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तीसरी बार शिकार बनी कैश लोडिंग एजेंसी

Tue, 10 Dec 2013 09:14 AM IST
अमर उजाला, पंचकूला
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जिलेभर में अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। छिटपुट घटनाओं के अलावा अब अपराधी बड़ी वारदात करके भी आसानी से निकल जाते हैं। पिंजौर-सिसवां मार्ग पर कैश वैन से सोमवार को 1.68 करोड़ की लूट हुई।
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जिले में यह तीसरी घटना है, जब कैश लोडिंग एजेंसी लुटेरों का शिकार बनी। इससे पहले भी कैश लोडिंग वैन को शिकार बनाया गया, जबकि एक बार एजेंसी का कारिंदा बाइक पर पैसे जमा कराने जा रहा था, तो उसे गोली मारकर लूट लिया गया था। खास बात यह है कि तीन वारदात में दो बार सीएमएस कंपनी ही शिकार बनी।

इसी साल 17 जनवरी को सेक्टर-14 में एक व्यक्ति के पैर पर गोली मारकर 17 लाख रुपये लूट लिए गए थे। वह भी सीएमएस कंपनी का कारिंदा था और बाइक पर बैंक में पैसे जमा कराने जा रहा था।
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इससे पहले 31 अक्तूबर 2011 को सेक्टर-5 में कैश सिक्योरिटी एजेंसी की वैन से साढ़े 13 लाख रुपये लूट लिए गए थे। उस समय लुटेरे दो थे और पीड़ित भी दो। तीनों वारदात अब तक अनसुलझी है।

पिछले साल अक्तूबर में पिंजौर के अमरावती में बैंक के सामने पेट्रोल पंप कारिंदों से 16 लाख रुपये की हुई लूट अब तक अनसुलझी है।

कुल मिलाकर चार साल में लूट की 10 वारदात अब भी अनसुलझी हैं, जिसमें से सात वारदात को जैन गैंग ने अंजाम दिया और दो वारदात में इटीयोज गाड़ी का इस्तेमाल किया गया। अब ताजी वारदात में वेरान कार का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस इस गैंग को जैन गैंग के साथ नहीं जोड़ रही है, क्योंकि उस गैंग में एक पगड़ीधारी युवक है। यदि पुलिस का कयास सही निकला तो पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल पहली बार हुआ है, क्योंकि जैन गैंग ऐसा नहीं करता।

अभी तक हरियाणा में बद्री गैंग ही वर्दी डालकर लूट करता था, लेकिन इस गैंग के सभी सदस्य सजा काट रहे हैं और पंचकूला पुलिस ने बद्री का एनकाउंटर कर दिया था।

वैन का सिस्टम खराब था, लुटेरों को थी जानकारी
पिंजौर-सिसवां मार्ग पर लूटपाट करने वाले लुटेरों को पता था कि कैश चैंबर कैसे खुलता है। हालांकि कंपनी की गाड़ियों में ऐसा सिस्टम है कि जब खिड़की खुली होगी, तो कैश चैंबर नहीं खुलता, लेकिन इस गाड़ी का सिस्टम खराब था।

इसके अलावा कैश चैंबर के दरवाजे पर एक ऐसा बटन था, जिसे दबाने पर दरवाजा खुल जाता था, भले ही खिड़की खुली हो। लुटेरों को इन तमाम बातों की जानकारी थी, क्योंकि उन्होंने यही बटन दबाकर कैश चैंबर का दरवाजा खोला। इसके बाद पिछली सीट को आगे की तरफ गिराकर इसी दरवाजे से बक्सा निकाला।

यह छोटा बक्सा था, जबकि बड़ा बक्सा होता तो वह इस रास्ते से नहीं निकलता। लुटेरों को इस बात का पता था, तभी उन्होंने ड्राइवर नेमपाल से आगे की तरफ लगा वह गियर खिंचवाया, जिससे गाड़ी के साइड में लगा कैश चैंबर का मुख्य दरवाजा खुलता है।

गियर खींचने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो लुटेरों ने कैश चैंबर को अल्टरनेट दरवाजे से ही बक्सा निकाल लिया।

मोहाली से चोरी हुई कार में आए थे लुटेरे!
पुलिस की वर्दी में लुटेरे जिस वेरना कार में आए थे, वह मोहाली से चोरी हुई थी। यह कार तीन दिन पहले ही चोरी हुई थी। पुलिस के हाथ यह पुख्ता सबूत लगा है।

जिस जगह यह वारदात हुई, वहां तक चंडीगढ़ से आते वक्त मुल्लांपुर में एक बैरियर है, जहां सीसीटीवी लगा है। उसमें कैश लोडिंग वैन तो नजर आ रही है, लेकिन वेरना नहीं दिखी।

दूसरा रास्ता कुराली बैरियर से आने का है। प्राथमिक जांच में वहां से भी वेरना के आने का सुराग नहीं मिला है, लेकिन कुराली बैरियर से कुछ पहले एक रास्ता गांवों से होता हुआ रोपड़ निकलता है।

अगर लुटेरों ने इस रास्ते का इस्तेमाल किया है तो यहां कहीं भी सीसीटीवी नहीं है।

नंबर था 7812
लूटपाट के शिकार हुए कंपनी के कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि गनमैन गुलशन आगे की सीट पर ही बैठा रहा और आंखों को साफ करने की कोशिश करता रहा, जबकि ड्राइवर नेमपाल को लुटेरों ने गन प्वाइंट पर ले रखा था।

कैश का कस्टोडियन सूरज पीछे की अपनी सीट पर बैठा था, जबकि गनमैन यशपाल को लात मारकर सीट से नीचे गाड़ी के फर्श पर गिरा दिया गया था।

 बक्सा लेकर भागने के बाद ड्राइवर ने वेरना कार का नंबर नोट करना चाहा और सिर्फ 7812 ही पढ़ पाया।

ग्राफ बढ़ रहा, सुलझ नहीं रही वारदात की गुत्थी
- 21 जनवरी को सेक्टर-14 व 12 की डिवाइडिंग पर कार सवार चार युवकों ने एक युवक को गोली मारकर साढ़े 17 लाख रुपये लूट लिए थे।

नवंबर 2009 में बिजली निगम से 18 लाख की लूट।
इससे पहले अमर टैक्स चौक पर बर्कले के कर्मचारी को गोली मारकर चार लाख की लूट।

16 अगस्त 2009 को सेक्टर-5 स्थित पेट्रोल पंप से ढाई लाख की लूट।
मार्च 2008 में विशाल मेगा मार्ट के नजदीक साढ़े चार लाख की लूट।

जुलाई 2008 में सेक्टर-4 के पेट्रोल पंप से सात लाख की लूट।
फरवरी 2012 में सेक्टर-14 से छह लाख रुपये की लूट।

सेक्टर-12 में एक युवक को गोली मारकर 10 लाख की लूट।
इसी साल सेक्टर-5 में कैश लोडिंग कंपनी के कर्मचारियों से साढ़े 13 लाख रुपये लूटे।

इस साल तीन अक्तूबर को अमरावती में 16 लाख रुपये की लूट।

ये लापरवाही भारी पड़ी
कर्मचारियों को निर्देश हैं कि कहीं रास्ते में गाड़ी नहीं रोकी जाए। इसके बावजूद बीच रास्ते वैन को रोका गया।
वैन पूरी तरह से कवर थी और सभी खिड़कियों पर जाली लगी थी।

इसके बावजूद चारों तरफ की खिड़कियों के शीशे नीचे थे। वैन के पीछे कैश के बक्से को चेन से नहीं बांधा गया था, जबकि कैश चैंबर में रखे बक्से की चेन से लॉकिंग की जाती है। 
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कैश चैंबर को बंद करना होता है, लेकिन वह लॉक नहीं था, क्योंकि लॉकिंग सिस्टम में खराबी थी।
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