उन्होंने यह भी मांग है की है कि सरकार निजी ट्रांसपोर्टरों द्वारा खरीदी गई बसों को खरीद कर रोडवेज के बेड़े में शामिल करें। कर्मचारी नेताओं के अनुसार सरकार कम से कम 3 हजार नई बसें जल्द बेड़े में शामिल करे, ताकि प्रदेश की जनता को एक बेहतरीन परिवहन सुविधा मिल सके और परिवहन विभाग को घाटे से उबारा जा सके। जबकि इसके जरिए बेरोजगार युवकों को स्थाई रोजगार मिल सके। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने किलोमीटर स्कीम के तहत बसें लेने का प्रयास किया तो रोडवेज कर्मचारियों को एक बार फिर से बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
घोटाले के आरोपी अफसरों को बचाना चाहती है सरकार: अभय
इसी मसले पर इनेलो ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है। इनेलो विधायक अभय चौटाला ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार किलोमीटर घोटाले में लिप्त अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है। चौटाला ने कहा कि एक तरफ तो सरकार ने किलोमीटर स्कीम को रद्द करते हुए ट्रांसपोर्ट को अपनी अर्नेस्ट मनी वापस करने का निर्णय लिया था और दूसरी तरफ परिवहन मंत्री उन्हीं बस मालिकों को फिर से बसों को सड़क पर उतारने की रजामंदी देते हैं।
चौटाला ने कहा कि इस समय से प्रदेश लगभग 10 हजार बसों का टोटा झेल रहा है। सरकार अपने बेडे़ को सरकारी बसों से क्यों पूरा नहीं कर रही है। उनके अनुसार परिवहन मंत्री अगर परिवहन के डिपुओं के कामकाज की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाएं, तो स्पेयर पार्टस का घोटाला किलोमीटर घोटाले से भी बड़ा निकलेगा।