चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय के पीछे सेक्टर-9/10 जनमार्ग पर 144 किमी की रफ्तार कैमरे में कैद है। ओवरस्पीड के ऑटोमेटिक चालान ऑनलाइन चालान कटे हैं। ओवरस्पीड डिटेक्शन सिस्टम ने पुलिस अफसरों के वाहनों को भी बख्शा नहीं है।
चंडीगढ़ की सड़कें रात को फार्मूला वन का ट्रैक बन जाती हैं। सरपट दौड़ने वाली गाडि़यों की रफ्तार 150 किलोमीटर से भी अधिक होती है। शहर में होने वाले सड़क हादसों की वजह में सबसे ज्यादा वाहनों की तेज रफ्तार है।
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शहर में पिछले चार साल में हुए 796 सड़क हादसों में 321 लोगों की जानें जा चुकी हैं और 679 चोटिल हो चुके हैं। दूसरी ओर, यातायात पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद लोग तेजरफ्तार वाहन चलाने के साथ रेड लाइट जंप करने से बाज नहीं आ रहे।
80 फीसदी हादसे रात को
रात के समय रेड लाइट जंप और तेज रफ्तार खतरनाक साबित हो रही है। शहर में होने वाले हादसों में 80 प्रतिशत रात को हुए हैं जिसमें सैकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस की सख्ती के बाद सड़क हादसों में कमी आई है। पिछले तीन साल में तेज रफ्तार के 5 लाख 45 हजार 250 और लाल बत्ती जंप करने वालों के 11 लाख 12 हजार 590 चालान कट चुके हैं।
तेज रफ्तार के सबसे अधिक चालान फैदां बैरियर से सेक्टर-46/47-48/49 चौक की तरफ जाने वाले विकास मार्ग पर हुए हैं, जिसमें 144 से 150 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार ओवरस्पीड डिटेक्शन सिस्टम में कैद हो चुकी है। वहीं, दिन के समय ट्रैफिक पुलिस स्पीड रडार गन से तेजरफ्तार वाहन चालकों के चालान काट रही है।
शहर में बढ़ रहे सड़क हादसों को देखते हुए एसएसपी (ट्रैफिक) सुमेर प्रताप सिंह ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को रातभर ड्यूटी करने के निर्देश दिए हैं। रात को ड्रंकन ड्राइविंग नाकों के अलावा स्पीड रडार गन लगाकर चालान किए जाते हैं। ट्रैफिक लाइट पॉइंट और चौराहों पर रात भर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को आदेश दिए हैं, ताकि लोग पुलिस को देखकर ट्रैफिक नियम न तोड़ें। ट्रैफिक एसएसपी ने तेजरफ्तार, बिना हेलमेट, रेड लाइट जंप, ड्रंकन ड्राइविंग पर आरसी और लाइसेंस सस्पेंड करने के आदेश दिए हैं।
निर्धारित रफ्तार कम करने से रुक सकते हैं हादसे
चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व डीआईजी (ट्रैफिक) शशांक आनंद लंदन में इंटरनेशनल ट्रेनिंग पर गए थे। वहां उन्होंने देखा कि तेज रफ्तार से सड़क हादसे रोकने के लिए सड़कों पर वाहनों के चलने की निर्धारित की गई रफ्तार को कम कर दिया गया था। इससे सड़क हादसों में काफी कमी आई थी। अगर उसी तरह चंडीगढ़ में भी तय रफ्तार कम कर दी जाए तो सड़क हादसे कम हो सकते हैं। चंडीगढ़ में मध्य मार्ग पर 60 किमी की रफ्तार तय है। सुबह और शाम के समय लोग ड्यूटी पर आते जाते समय तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं। ऐसे में अगर तय की गई रफ्तार को कम कर दिया जाए तो सड़क हादसों में कमी आ सकती है। शहर की हर सड़क पर एक रफ्तार तय की गई है। उससे तेज चलाने पर चालान काटा जाता है। उन जगहों पर चिह्नित कर निर्धारित रफ्तार को कम करना चाहिए।
गलतफहमी में न रहें, 500 मीटर पहले रडार रफ्तार को कर लेता है कैच
पुलिस के अनुसार लोगों को लगता है कि चौराहे से पहले गाड़ी को धीमा कर लेंगे, लेकिन अत्याधुनिक रडार वाहन को 500 मीटर पहले से कैच कर लेते हैं और यातायात नियमों को तोड़ने पर कार्रवाई करते हैं। सीसीटीवी कैमरों के साथ शहर में ट्रैफिक लाइट पॉइंट और चौराहों पर लगे रडार भी अलर्ट पर रहते हैं। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि लाल बत्ती और तेज रफ्तार से वाहन चलाकर जान को खतरे में न डालें।
रेड लाइट जंप और तेज रफ्तार के चालान के आंकड़े
साल कुल चालान रेड लाइट जंप तेज रफ्तार
2022 596795 183409 189688
2023 990069 427892 207953
2024 991748 501289 147609
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ट्रैफिक पुलिस सड़क हादसे रोकने के लिए हर प्रयास कर रही है। तेज रफ्तार वाहन चालकों को किसी की जान जोखिम में डालने नहीं दिया जाएगा। - सुमेर प्रताप सिंह, एसएसपी ट्रैफिक