रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) से फर्जी कागजात के आधार पर लग्जरी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन मामले में आरोपी दिल्ली निवासी दीपक बंसल ने मंगलवार को जिला अदालत में सरेंडर कर दिया। सरेंडर के साथ ही अदालत ने उसे 25 हजार रुपये के बेल बांड पर जमानत दे दी। साथ ही बिजनेसमैन को विजिलेंस जांच ज्वाइन करने के आदेश दिए हैं।
बता दें कि इससे पहले 28 अक्तूबर को जम्मू निवासी बिजनेसमैन कार मालिक संजय अरोड़ा ने अदालत में सरेंडर किया था। अदालत ने उसे भी जमानत दे दी थी। इससे पहले दोनों कार मालिकों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए 30 सितंबर को अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी थी। करीब महीना भर इस पर सुनवाई टलने के बाद 28 अक्तूबर को जम्मू निवासी आरोपी संजय अरोड़ा के सरेंडर के बाद मंगलवार को दिल्ली निवासी आरोपी ने भी सरेंडर कर दिया। इस पर अदालत से उसे जमानत मिल गई।
वहीं पिछली सुनवाई पर यूटी विजिलेंस ने आरएलए कर्मचारी विनोद कुमार के खिलाफ सप्लीमेंट्री चालान पेश किया था। विनोद के सरकारी कर्मचारी होने पर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार की धारा में आरोप लगाने पर मामला भ्रष्टाचार से जुड़ गया था। इसलिए अन्य आरोपियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की धारा को जोड़ा गया था। मामले की अगली सुनवाई पर आरोपियों के खिलाफ आरोप तय हो सकते हैं। इसके साथ ही केस का ट्रायल शुरू हो जाएगा।
ये है मामला
विजिलेंस विभाग को 10 जून को शिकायत मिली थी कि आरएलए में कुछ गाड़ियों की आरसी फर्जी कागजातों के आधार पर बनवाई गई है। इसके बाद विजिलेंस के अधिकारियों ने पिछले महीने आरएलए से चार गाड़ियों की फाइलें जब्त की थीं। इनकी जांच करने के बाद विजिलेंस ने तीन गाड़ियां दिल्ली और पानीपत से जब्त की थीं। हालांकि इन कार मालिकों की गिरफ्तारियां अभी तक नहीं हुई हैं। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि गाड़ियों के इनवायस में छेड़छाड़ कर गाड़ियों की कीमत कम कर दिखाई थी ताकि रजिस्ट्रेशन के वक्त टैक्स में कमी हो सके।