चंडीगढ़। ट्राइसिटी में मेट्रो चलाने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है लेकिन शहर का एक तबका ऐसा भी है जिसका मानना है कि चंडीगढ़ को मेट्रो की जरूरत नहीं है। इनका दावा है कि परिवहन विभाग सीटीयू की बसों की संख्या बढ़ाकर सुविधाओं को बेहतर बना दे तो मेट्रो की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इसको लेकर रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स) ने भी प्रशासन को कई सुझाव दिए हैं। कहा है कि जाम को कम करने के लिए लोगों को बसों में सफर करने के लिए जागरूक करना होगा और मनीमाजरा और मोहाली में दो नए आईएसबीटी बनाने होंगे।राइट्स की तरफ से कहा गया है कि ट्राइसिटी में अभी चंडीगढ़ के सेक्टर-17, 43 और पंचकूला के सेक्टर-5 में ही आईएसबीटी है जबकि जाम को कम करने के लिए मनीमाजरा और मोहाली के सेक्टर-87 में में एक-एक आईएसबीटी बनाने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में चार बस डिपो हैं जो शहर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं। इसमें सीटीयू का डिपो नंबर-1 और डिपो नंबर-1 का दूसरा पार्ट इंडस्ट्रियल एरिया फेज-वन में है, डिपो नंबर-2 सेक्टर-25 में और आईएसबीटी-43 में भी एक वर्कशॉप है हालांकि बस सेवा को और बेहतर बनाने के लिए रायपुर कलां, खुड्डा लाहौरा और धनास में एक-एक डिपो बनाने की जरूरत है। राइट्स ने शहर में चलने वाली बसों का भी सर्वे किया है और पाया है कि सीटीयू के वर्तमान रूटों में अभी भी कुछ रूट गायब हैं, जिन पर सवारियों की संख्या काफी ज्यादा है। इसके लिए राइट्स ने हाई डिमांड बस कॉरिडोर की भी जानकारी दी है।
राइट्स ने बताया ये हैं हाई डिमांड बस कॉरिडोर
- आईएसबीटी सेक्टर-43 से न्यू चंडीगढ़ (21 किमी)
- सेक्टर-87 मोहाली से मनसा देवी कांप्लेक्स (24 किमी)
- आईएसबीटी सेक्टर-43 से आईएसबीटी पंचकूला (16 किमी)
- आईएसबीटी सेक्टर-17 से खरड़ बस अड्डा (19 किमी)
- पीजीआई/डड्डूमाजरा से जीरकपुर बस अड्डा (17 किमी)
- पीजीआई से आईएसबीटी पंचकूला (12 किमी)
- खरड़ बस अड्डा से जीरकपुर बस अड्डा (12 किमी)