शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में उठी रार खत्म नहीं हो रही। अब पार्टी के बागी धड़े ने आरोप लगाया है कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को माफी दिलाने में शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल और डॉ. दलजीत सिंह चीमा की अहम भूमिका रही है।
बीबी जगीर कौर ने कहा कि बादल ने डेरा प्रमुख को माफी दिलाई है। जस्टिस रणजीत सिंह की किताब में इसका दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि जत्थेदारों को चंडीगढ़ बुलाकर दवाब बनाया गया, जिसके बाद ही डेरा मुखी को माफी दिलाई गई। बीबी जगीर कौर ने कहा कि इससे शिअद का बहुत नुकसान हुआ है। यही कारण है कि लोगों का विश्वास पार्टी खो बैठी है और इसी का वह विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख ने सिख परंपराओं का ध्यान नहीं रखा है।
शिअद का जवाब
शिरोमणि अकाली दल के मुख्य प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने भी बागी गुट पर जवाबी हमला बोला है। कलेर ने कहा कि बादल पर तो बागी नेता सवाल उठा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ डेरा प्रमुख की पैरोल पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। इनमें से कई नेता डेरे में भी वोट मांगने गए थे तो बाद में उनको माफी मांगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि आज जस्टिस रणजीत सिंह की रिपोर्ट निकाल ली गई। आरोप लगा रहे कि जत्थेदार बादल के घर गए थे। रिपोर्ट में भी ऐसा कुछ उल्लेख नहीं है कि जत्थेदार साहिब को पूर्व सीएम व बादल साहिब की कोठी में बुलाया गया था। वहां सुरक्षा में केंद्रीय एजेंसियों के कर्मी भी होते है। वहां हर एक आने जाने वाले व्यक्ति का रिकार्ड होता है, इसलिए बागी नेताओं की गलत बयानबाजी से उनकी बौखलाहट अब सबके सामने आ गई है। कलेर ने कहा कि अगर बागी गुट को सही मायने में पार्टी से नाराजगी थी तो उन्होंने पिछले तीन चुनाव क्यों लड़े। आरोप लगाया कि बागी गुट में से कई नेताओं ने वर्ष 2017, 2019 और 2022 में भी चुनाव लड़ा, लेकिन अब वह पार्टी के प्रति अपने नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर पार्टी तोड़ने का प्रयास
उन्होंने कहा कि बागी नेताओं ने अकाली सरकार पर बड़ी गलतियों का आरोप लगाते हुए श्री अकाल तख्त जाकर माफी मांगी है, लेकिन अब वह अकाल तख्त साहिब पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। इससे उनका दोहरा चरित्र लोगों के सामने आ गए हैं। उन्होंने पहले भाजपा व केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर पार्टी को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने मकसद में सफल नहीं हो पाए हैं।