‘सेवा का अधिकार’ (आरटीएस) कानून के तहत जनता को दी जाने वाली सेवाएं तय समय पर दी जाएं। साथ ही काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश डायरेक्टर प्रशासनिक सुधार विभाग एचएस कंधोला ने नगर निगम भवन में अधिकारियों को दिए। वह ‘सेवा का अधिकार’ कानून के तहत नागरिकों को दी जाने वाले सुविधाओं के बारे में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे।
कंधोला ने बताया कि राज्य सरकार ने ‘सेवा का अधिकार’ कानून के तहत लोगों के लिए 149 सेवाएं नोटिफाई की हैं। इनका समय भी निर्धारित किया गया है। ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के धक्के खाने से बचाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को नसीहत दी कि आरटीएस के तहत दी जाने वाले सेवाओं के प्रति पूरी गंभीरता के साथ काम करें। साथ ही बकाया प्रार्थना पत्रों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करें।
जिले में आरटीएस के तहत मिलने वाली सेवाओं की समीक्षा ऑनलाइन शुरू की गई है। जिले में यह काम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। जो नागरिक सुविधा सेंटर की बजाय सेवाएं हासिल करने के लिए अपने प्रार्थना पत्र विभिन्न विभागों को देते हैं, उनकी समीक्षा के लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसमें सेहत विभाग, ट्रांसपोर्ट, मकान निर्माण विकास व माल विभागों के प्रार्थना पत्रों की समीक्षा ऑनलाइन शुरू की गई है।
49 हजार 630 प्रार्थना पत्र आए
एडीसी पूनमदीप कौर ने बताया कि जिले में अगस्त तक सुविधा केंद्रों के माध्यम से 49 हजार 630 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 49 हजार 604 सेवाएं निर्धारित समय में मुहैया करवाई गईं।
आरटीएस के तहत काम की समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जो औचक जांच कर सारे काम पर नजर रखती है। इस कमेटी में प्रशासन के सीनियर अधिकारी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि सारे विभागों को हिदायत दी गई है कि आरटीएस के तहत आने वाले प्रार्थना पत्रों के लिए अलग रजिस्ट्रर बनाया जाए। जिले में इस कानून को सख्ती से लागू किया जा रहा है।