अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषोन्ति योजना की राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वार्षिक कार्य योजना (एएपी) को मंजूरी दे दी। सरकार की ओर से किसानों को सौगात के तौर मंजूरी दी गई। इस योजना में कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए 1198.27 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की कुल कार्य योजना 995.50 करोड़ रुपये की है, जबकि कृषोन्ति योजना की कार्य योजना 203.27 करोड़ रुपये की है। मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंजूरी मिली है। मुख्य सचिव ने कहा कि कपास वाले क्षेत्र में गुलाबी सुंडी का प्रकोप से निपटने के लिए कृषि विश्वविद्यालय गांवों को गोद लेकर किसानों को प्रशिक्षण दे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा मृदा परीक्षण के लिए एक एप विकसित की जा रही है, जिससे आप मृदा परीक्षण के रिपोर्ट किसानों के मोबाइल फोन पर ही उपलब्ध होगी। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने एक लाख एकड़ भूमि को सूक्ष्म सिंचाई के तहत लाने का लक्ष्य रखा है। मुख्य सचिव ने कहा कि रोहतक, झज्जर, सोनीपत, भिवानी, हिसार, जींद, चरखी दादरी, फतेहाबाद, नूंह, गुरुग्राम, सिरसा, पलवल और फरीदाबाद में जलभराव और लवणीय मृदा के पुनर्वास के लिए 1500 लाख रुपये का आवंटन किया गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि बावल में गाय-केंद्रित प्राकृतिक खेती मॉडल और अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी। बागवानी फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पंचकूला स्थित कृषि किसान केंद्र में एक हाइड्रोपोनिक यूनिट स्थापित करने के लिए स्वीकृत किए गए हैं। यहां पर प्राकृतिक खेती और आधुनिक भंडारण संरचनाओं सहित कई परियोजनाओं के लिए 497.30 लाख रुपये दिए जाएंगे। महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल को गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं और मौसम केन्द्रों की स्थापना के लिए 240 लाख रुपये और आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल को गेहूं रोग नियंत्रण और कृषि-उद्यमिता केंद्र के लिए 673.50 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।