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Chandigarh News: विधायकों के संख्या बल के अनुसार भाजपा के उम्मीदवार का जीतना तय

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चंडीगढ़। चुनाव आयोग ने हरियाणा की खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के अनुसार 14 अगस्त को अधिसूचना के साथ नामांकन शुरू हो जाएंगे। तीन सितंबर को सुबह नौ से चार बजे तक मतदान होगा और उसी दिन पांच बजे वोटों की गिनती कर परिणाम जारी कर दिए जाएंगे। विधानसभा में दलीय स्थिति के अनुसार भाजपा उम्मीदवार का जीतना तय है। क्योंकि उनके पास 43 विधायकों का समर्थन है। इसके अलावा किरण चौधरी और जजपा के दो विधायकों का भी उन्हें समर्थन प्राप्त है। संभव है कि विपक्ष की ओर से शायद ही कोई उम्मीदवार उतारा जाए। कांग्रेस ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उनके पास संख्या बल नहीं है। ऐसे में वह उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा के रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद बनने के बाद राज्यसभा की सीट खाली हुई है, जिसका कार्यकाल अप्रैल 2026 तक है। हरियाणा की एक सीट के साथ देश की 11 अन्य राज्यसभा की सीटों पर चुनाव की अधिसूचना जारी की गई है। नामांकन की आखिरी तारीख 21 अगस्त है। अगले ही दिन नामांकन फार्म की सत्यता जांची जाएगी। 27 अगस्त तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। हरियाणा में पांच राज्यसभा सीटे हैं, तीन पर भाजपा के सुभाष बराला, कृष्णलाल पंवार और रामचंद्र जांगड़ा सांसद हैं। वहीं एक सीट पर निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा सांसद हैं। शर्मा को भाजपा का समर्थन प्राप्त है। राज्यसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद कयास लगाने शुरू हो गए हैं कि भाजपा से उम्मीदवार कौन होगा। पार्टी इसे लेकर काफी दिनों से मंथन कर रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा किरण चौधरी पर दांव खेल सकती है।
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हरियाणा विधानसभा की वर्तमान स्थिति: भाजपा को 43 विधायकों का समर्थन प्राप्त
राज्य की 90 विधानसभा में मौजूदा समय में 87 विधायक हैं। इसमें भाजपा के पास 41 विधायक हैं। साथ में एक निर्दलीय विधायक और हलोपा के विधायक का समर्थन प्राप्त है। इस हिसाब से भाजपा के पास 43 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, कांग्रेस के 29 सदस्य हैं। इसके साथ ही कांग्रेस को तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। इस हिसाब से कांग्रेस के पास 32 विधायक हैं। वहीं, जजपा के 10, इनेलो का एक विधायक सदन में है। विधायक किरण चौधरी अभी भाजपा के पाले में हैं और स्पीकर का उनकी विधायकी को लेकर कोई फैसला नहीं आया है। यदि चुनाव तक उन पर कोई फैसला नहीं आता है तो वह भाजपा को वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं। जजपा के दो विधायक जोगीराम सिहाग व रामनिवास के खिलाफ भी विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखा गया है। जजपा के दोनों विधायक भाजपा को खुले तौर पर समर्थन दे चुके हैं। ऐसी परिस्थितियों में भाजपा का पलड़ा भारी है।
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