लोकसभा चुनाव के बाद अकाली-भाजपा रिश्तों में आई खटास में मंगलवार को कुछ कमी आने का संकेत मिला। शिअद अध्यक्ष व पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा के बीच हुई मुलाकात के दौरान गिले-शिकवों का दौर चला। बैठक के अंत में परस्पर विरोधी सख्ती का रुख कुछ नरम होता दिखाई पड़ा।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की प्रधानमंत्री से मुलाकात पर भाजपा के वरिष्ठ नेता बलरामजी दास टंडन द्वारा सवाल उठाए जाने पर ऐतराज किया, तो कमल शर्मा ने शिअद महासचिव महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल की ओर से टंडन के खिलाफ दिए गए बयान की बात की।
सुखबीर ने कमल शर्मा से कहा कि उनसे तो प्रदेश भाजपा नेताओं को कुछ शिकवा-शिकायत हो सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री तो सबके साझा हैं। उनकी प्रधानमंत्री से मुलाकात पर ही टंडन ने ऐतराज जता दिया, यह दुखदायी है।
साथ ही कहा कि वह तथा मुख्यमंत्री बादल रुटीन में प्रधानमंत्री मोदी व केंद्रीय मंत्रियों से मिलने गए थे। इसमें प्रदेश भाजपा नेताओं की अनदेखी वाली तो कोई बात ही नहीं है। इसलिए ऐसी छोटी-छोटी बातों को लेकर लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों में दरार पैदा नहीं होनी चाहिए।
इस पर कमल शर्मा ने कहा कि टंडन ने केवल यह कहा था कि यदि दोनों सहयोगी दलों के नेता प्रदेश के मसलों पर एक साथ केंद्र सरकार के पास जाएं, तो उसका अच्छा मैसेज जाता है। इसे शिअद की तरफ से इस तरह से पेश किया गया कि प्रदेश भाजपा नेता चाहते हैं कि मुख्यमंत्री कोई भी काम करने से पहले उनकी मंजूरी लें, जो कि कतई सही नहीं है।
कमल ने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के दौरान यदि प्रदेश के संबंधित भाजपा मंत्री भी साथ होते तो अच्छा रहता। इसके साथ ही व्यापार व उद्योगों पर टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स, रेत-बजरी की कमी आदि मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसका अंत शांतिपूर्ण माहौल में हुआ।