चुनाव सुधारों की बातें सिर्फ हवा-हवाई हैं। पंजाब चुनाव में तो कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। 100 से ज्यादा दागी प्रत्याशी मैदान में हैं। पढ़े-लिखों की बात करें तो राजनीतिक दलों के करीब 40 फीसदी प्रत्याशी सिर्फ 12वीं पास हैं।
कुछ पार्टियों की हालत तो इससे भी खराब है। बीएसपी के सात प्रत्याशी तो अनपढ़ हैं। शिअद के 19 उम्मीदवार सिर्फ दसवीं पास हैं, जबकि आप के 23 उम्मीदवार। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक दलों को टिकट बांटते समय खुद से एक मानक बनाना चाहिए। उनकी पार्टी का उम्मीदवार कम से कम ग्रेजुएट तो हो। जब उम्मीदवार पढ़ा-लिखा होगा, तभी वह अपनी बात मजबूती से और तर्क से रख सकेगा।
बसपा : 79 प्रतिशत प्रत्याशी 12 वीं पास
कांग्रेस : 45 प्रतिशत प्रत्याशी 12वीं पास
आप : 46 प्रतिशत प्रत्याशी 12वीं पास
शिअद : 32 प्रतिशत प्रत्याशी 12वीं पास
अपना पंजाब : 51 प्रतिशत प्रत्याशी 12वीं पास
बीजेपी : 40 प्रतिशत प्रत्याशी 12वीं पास
हवा-हवाई है चुनाव सुधारों की बात
विधानसभा चुनाव में गुम हुई उपचुनाव की गूंज
- फोटो : File Photo
पार्टी अनपढ़ पांचवीं आठवीं दसवीं बारहवीं ग्रेजुएट ग्रेजुएट प्रो. पोस्ट ग्रेजुएट डायेक्टोरेट अन्य नहीं दिया कुल
निर्दलीय 20 22 37 76 65 27 17 23 0 10 7 304
बीएसपी 7 12 16 35 20 4 4 5 0 8 0 111
कांग्रेस 0 1 6 26 20 30 17 15 1 1 0 117
आप 0 0 3 20 29 20 13 22 0 5 0 112
शिअद 0 4 6 9 10 25 17 17 2 4 0 94
अ.पंजाब 0 2 7 18 13 13 8 13 2 1 0 77
भाजपा 0 1 2 3 3 5 4 5 0 0 0 23
इससे साफ पता चलता है कि राजनीतिक दलों ने युवाओं को टिकट बहुत कम दी हैं। आज का युवा कम से कम ग्रेजुएट हैं। दलों को चाहिए कि वे कानून की पढ़ाई करने वाले, हायर एजुकेशन से संबंधित, चिकित्सा व एग्रीकल्चर के क्षेत्र से संबंधित लोगों को भी टिकट दें। इससे स्टेट की डेवलपमेंट पर फर्क पड़ेगा। कहने का मतलब है कि प्रोफेशनल लोगों को नुमाइंदी देनी चाहिए। अब कम पढ़े-लिखे से बात नहीं बननी वाली।
प्रो. भूपेंद्र बराड़, पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़