पूरे मामले का मास्टरमाइंड शिवांग एसडीएम गुहला और कैथल के कार्यालय में कंप्यूटर प्रोग्रामर के तौर पर काम करता है। तीन अप्रैल को कैथल में आयोजित एनकोर पोर्टल के प्रशिक्षण में शिवांग भी गुहला से आकर शामिल हुआ था। प्रशिक्षण के दौरान उसने पोर्टल का पासवर्ड चोरी कर लिया था।
आम आदमी पार्टी की ओर से किए गए आवेदन के बाद चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अनुमति देने के बजाय अपशब्द का प्रयोग करने के मामले में गिरफ्तार हुए दोनों आरोपियों ने पुलिस के सामने जुर्म कबूल किया है।
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पुलिस की ओर से अब तक की गई जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एसडीएम कार्यालय नहीं, बल्कि घर पर बैठकर मोबाइल के माध्यम से यूजर आईडी का दुरुपयोग किया था। इसकी जानकारी डीएसपी मुख्यालय उमेद सिंह ने दी। पुलिस ने आरोपी जूनियर प्रोग्रामर शिवांग और प्रवीन को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें सशर्त जमानत दे दी गई।
पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कार्यालय में कार्यरत दूसरे प्रोग्रामर को फंसाने के लिए आवेदन पर अपशब्द लिखे थे। बताया गया कि आरोपी मामले में सीधे तौर पर कहीं भी शामिल नहीं थे, इसलिए उनका सोचना था कि किसी की प्रकार से उन पर शक नहीं होगा। डीएसपी उमेद सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से यह भी जानकारी ली जा रही है कि इस मामले में उनके अलावा कौन-कौन लोग शामिल थे। उन्होंने बताया कि एसडीएम कार्यालय के सस्पेंड किए गए कंप्यूटर ऑपरेटरों का मामले से कोई वास्ता नहीं है।
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साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ इंस्पेक्टर शिवकुमार ने बताया कि पूरे मामले का मास्टरमाइंड शिवांग एसडीएम गुहला और कैथल के कार्यालय में कंप्यूटर प्रोग्रामर के तौर पर काम करता है। तीन अप्रैल को कैथल में आयोजित एनकोर पोर्टल के प्रशिक्षण में शिवांग भी गुहला से आकर शामिल हुआ था। प्रशिक्षण के दौरान उसने पोर्टल का पासवर्ड चोरी कर लिया था। इसका मकसद एसडीएम कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर्स को रंजिश में फंसाना था।
इस काम में उसकी मदद पशुपालन विभाग में ग्रुप डी के कर्मचारी प्रवीन ने की। दोनों ने तीन अप्रैल की रात को शिवांग के घर पर धोखे से चुराए गए पासवर्ड का प्रयोग कर मोबाइल पर निर्वाचन आयोग का पोर्टल खोला। फिर जानबूझकर आवेदन पर गलत कमेंट किया और गालियां लिख दी। चार अप्रैल को सुबह भी उन्होंने दूसरे आवेदन पर गालियां लिखीं। उन्हें यह बात अच्छी से पता थी कि जो कमेंट उन्होंने लिखे हैं। उसे डिलीट नहीं किया जा सकता। पांच अप्रैल को घटना का पता लगने पर एसडीएम ने कार्यालय के पांच कंप्यूटर ऑपरेटरों को सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद इस मामले में छह अप्रैल को हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी ने कैथल के सहायक निर्वाचन अधिकारी कम एसडीएम ब्रह्म प्रकाश को भी निलंबित कर दिया था।