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खुलासा : मौत के पांच साल बाद मालिक ने तहसील में करा दी रजिस्ट्री

Sat, 11 Oct 2014 11:18 PM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
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मौत के पांच साल बाद बलदेवराज ने कराई थी पांच कनाल चार मरले भूमि की रजिस्ट्री। ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड में उक्त भूमि अब गांव सलपानी कलां वासी चरणजीत सिंह उर्फ हैप्पी पुत्र मोहिंद्र सिंह के नाम है।
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हैप्पी के नाम ये भूमि 26 नवंबर 2010 को मूलरूप से इसी गांव के वासी बलदेवराज ने कराई थी। सनसनीखेज पहलू ये है कि बलदेवराज नाम के जिस व्यक्ति ने उपरोक्त भूमि की रजिस्टरी चरणजीत सिंह के नाम पर चार साल पहले कराई थी।

उस बलदेव राज की मौत रजिस्ट्री कराने से पांच साल पहले दिल्ली में हो चुकी है। अब इस जमीन के असल मालिकों के परिजन एवं रिश्तेदार ये सवाल कर रहे हैं कि क्या 2010 में उक्त जमीन की रजिस्ट्री बलदेवराज की जगह उनके भूत ने कराई थी या उनकी जगह कोई फर्जी आदमी खड़ा करके ये फ्रॉड किया गया।
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यहां बता दें कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से सेवानिवृत्त रेलवे कर्मी बलदेव राज मूलरूप से सलपानी के रहने वाले थे। रेलवे से सेवानिवृत्त होने के बाद बलदेवराज की मौत 14 जनवरी 2005 को दिल्ली में हुई थी।

लेकिन उनकी करीब 5 कनाल चार मरले भूमि की रजिस्ट्री 26 नवंबर 2010 को चरणजीत सिंह पुत्र मोहिंद्र सिंह को हो गई।

रिकार्ड के अनुसार उक्त भूमि की रजिस्ट्री बलदेवराज ने कराई थी। जबकि उक्त जमीन के असली मालिक बलदेवराज की मौत रजिस्टरी कराने से पांच साल पहले हो चुकी थी।

‘अमर उजाला’ को जानकारी देते हुए स्वर्गीय बलदेवराज के रिश्तेदार पंजाब सिंह ने बताया कि जब उन्हें इस घटना का पता चला तो उन्होंने पुलिस को इस बारे सूचित किया था, लेकिन यहां संतोषजनक उत्तर न मिलने के कारण उन्होंने इस संदर्भ में कानूनी कार्रवाई के लिए 30 सितंबर 2014 को अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत ने इस मामले में गांव सलपानी कलां वासी चरणजीत सिंह हैप्पी और उसके रिश्तेदार जिला अंबाला के गांव अधोया वासी इंदरपाल सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति (फर्जी बलदेवराज) के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पुष्टि करने वाले नंबरदार की हो चुकी है मौत
तहसील में रजिस्ट्री के समय भूमि के असल मालिक होने की पुष्टि रिसाल सिंह नाम के नंबरदार ने की थी लेकिन नंबरदार रिसाल सिंह की मौत हो चुकी है।

लिहाजा अब ये मामले में पूछताछ चरणजीत सिंह और रजिस्ट्री के समय गवाह बने उनके रिश्तेदार अधोया वासी इंदरपाल सिंह से की जानी है। मामले की जांच पड़ताल में ही फर्जी बलदेवराज का खुलासा हो सकेगा।

दिल्ली में रह रहे असल मालिक
बलदेवराज की पत्नी सीता रानी एवं इंजीनियर पुत्र गुलशन कुमार एवं एक कंपनी में कार्यरत दूसरा पुत्र सतीश तीनों नई दिल्ली लारेंस रोड केशवपुरम त्रिनगर रह है।

इन्होंने रजिस्ट्री से पांच साल पहले बलदेवराज की मौत का प्रमाण पत्र भी सौंप दिया है। जाहिर कि बलदेवराज की मृत्यु के बाद उक्त जमीन का मालिकाना हक उन्हें की मिलना था।

बहरहाल पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच आरंभ कर दी है। पंजाब सिंह के मुताबिक जिस व्यक्ति ने ये जमीन अपने नाम कराई है, उसके खिलाफ पहले भी एफआईआर दर्ज हैं।

‘अमर उजाला’ कर चुका है दो खुलासे
अमेरिका की बीमा कंपनी से भारीभरकम राशि हड़पने के लिए पिहोवा के श्मशान घाट में पिता की जगह कुत्ते का संस्कार कर उन्हें मृत घोषित कर और श्मशान की इस रसीद के जरिये पिहोवा पालिका से मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का मामला 2011 में ‘अमर उजाला’ ने उजागर किया था।

वहीं महाराष्ट्र से फर्जी दस्तावेज बनवाकर रोडवेज के मृत इंस्पेक्टर को जिंदा दिखाकर थानेसर तहसील में रजिस्ट्री का भी खुलासा 2012 में ‘अमर उजाला’ ने ही किया था।
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