पहले तो कर्मचारियों ने तबादले रुकवाने की पुरजोर कोशिश की लेकिन असफल रहे। कर्मचारियों की मिलीभगत से मशीनों की टेंपरिंग का मामला उजागर न हो जाए, इसलिए तबादले पर जाने से पहले कर्मचारियों ने यहां की मशीनें खराब कर दीं ताकि मामला पकड़ में न आए। मशीनों को ठीक कराने के लिए सिटको ने संबंधित पेट्रोलियम कंपनी के इंजीनियरों को बुलाया।
इंजीनियरों ने पाया कि ऑयल की मात्रा को मापने वाले स्वाचालित यंत्रों को टेंपर किया गया है। इसकी पूरी रिपोर्ट इंजीनियरों ने सिटको प्रबंध तंत्र को दे दी है। फिलहाल टेंपरिंग की रिपोर्ट अमर उजाला के पास भी मौजूद है। जानकारी के मुताबिक मशीनों से ऐसी टेंपरिंग हो रही थी कि ऑयल कम पड़ने के साथ ही पर्ची निकालने में भी खेल चल रहा था।
बताया जाता है कि सरकारी वाहनों में तेल तो 20 लीटर भरवाया जाता था लेकिन पर्ची 50 लीटर की निकालकर दी जा रही थी। सिटको के इस पेट्रोल पंप पर प्रशासन, हेल्थ विभाग सहित लगभग सभी सरकारी विभागों के वाहनों में सालों से तेल भरा जा रहा था। यही वजह है कि यह घोटाला कई करोड़ का निकल सकता है।
इस घोटाले को कई करोड़ का इसलिए कहा जा सकता है कि 10 साल से अधिक समय बाद एक साथ 15 कर्मचारियों का तबादला इस पेट्रोल पंप से दूसरी जगहों पर किया गया है। इससे पहले अब तक किसी कर्मचारी का तबादला यहां से नहीं किया गया था। यही वजह है कि यदि घोटाले की जांच ठीक प्रकार से हुई तो चंडीगढ़ में हुआ अब तक का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
प्रतिदिन 22 लाख रुपये की ब्रिकी
इस पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन 22 लाख रुपये की क्रेडिट और कैश के माध्यम से ब्रिकी होती है। ऐसे में अब यह आकलन लगाना अभी संभव नहीं हो पा रहा है कि यह घोटाला कितने करोड़ का हो सकता है। बताया जाता है सभी सरकारी विभागों के 5 हजार से अधिक वाहन यहां तेल भरवाने के लिए आते हैं।
मशीनें खराब हुई थीं, जिसे ठीक करने के लिए संबंधित कंपनी को कहा गया था। कंपनी की ओर से क्या रिपोर्ट आई है, इस संदर्भ में मुझे कोई जानकारी नहीं है। सोमवार को रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है। - रूपिंदर कौर, एमडी, सिटको