पीयू के प्रोफेसरों की ओर से रिटायरमेंट एज 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति पर लगाई गई रोक वीरवार को हटा ली है।
जस्टिस अमोल रत्न सिंह सिद्धू वाली बेंच ने बुधवार को ही रोक हटाने का संकेत दे दिया था। बेंच ने रिटायरमेंट से रोक हटाते हुए मामला केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) को रेफर कर दिया है। अब नौकरी से जुड़े विषयों पर सुनवाई कैट में होगी।
प्रोफेसरों ने पीयू सिंडीकेट और सीनेट में रिटायरमेंट की एज बढ़ाने को लेकर लिए गए फैसले को आधार बनाते हुए याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि रिटायरमेंट एज बढ़ाने का निर्देश जारी किया जाए। मामले में केंद्र और पंजाब तथा यूजीसी को नोटिस जारी किया गया था।
साथ ही 60 साल की उम्र पूरी कर चुके प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी थी। नोटिस के जवाब में पंजाब सरकार ने कहा था कि वह रिटायरमेंट एज बढ़ाने के हक में नहीं है। वहीं केंद्र ने भी कहा था कि जब पंजाब ही सहमत नहीं है तो केंद्र भी रिटायरमेंट एज नहीं बढ़ा सकता।
इसी पर बेंच ने याचियों से पूछा था कि जब पंजाब और केंद्र सहमत नहीं हैं, तो वह किस आधार पर रिटायरमेंट एज बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस पर प्रोफेसरों के पास कोई ठोस जवाब नहीं था।
पीयू के प्रोफेसरों ने पीयू और इससे जुड़े कॉलेजों के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट एज सेंट्रल यूनिवर्सिटी की तर्ज पर बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि पीयू सेंट्रल यूनिवर्सिटी नहीं है और यह स्वायत्त इकाई है।