मोहाली। कुराली की 71 वर्षीय उर्मिल अग्रवाल साइबर ठगी का शिकार हो गईं हैं। गूगल पर बिजली विभाग का नंबर तलाशना उन्हें 2,43,513 रुपये महंगा पड़ा। साइबर ठगों ने उनके बैंक खाते से आठ ट्रांजेक्शन में यह रकम निकाल ली। उर्मिल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि 21 सितंबर को उनका बिजली का बिल नहीं आया था। वह गूगल पर बिजली विभाग का नंबर खोज रही थीं। उन्हें एक फर्जी मोबाइल नंबर मिला, जिस पर कॉल करने पर सामने वाले ने खुद को बिजली विभाग का बताया। आरोपी ने 10 रुपये गूगल-पे करने को कहा और एक लिंक भेजने का वादा किया। महिला ने 10 रुपये भेज दिए लेकिन कोई लिंक नहीं मिला। इसी दौरान ठगों ने उनका मोबाइल फोन हैक कर लिया। उनके नंबर पर आने वाली कॉल फॉरवर्ड होने लगीं। बाद में उनके बेटे गौरव अग्रवाल ने फोन की जांच की। उसमें टीनी जियो डॉट कॉम से संबंधित एक एप डाउनलोड मिला। एप हटाने के बाद बैंक खाते की जांच करने पर ठगी का पता चला।
ठगी का तरीका और नुकसान
आरोपियों ने आठ ट्रांजेक्शन में कुल 2,43,513 रुपये निकाले। इनमें 15,964, 16,000, 16,500, 40,000, 41,740, 48,000, 49,999 और 15,300 रुपये शामिल थे। रकम निकलने का पता चलते ही महिला ने अपने बेटे को सूचित किया। बेटे ने तुरंत बैंक खाता ब्लॉक करवाया और महिला ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला किया दर्ज
जांच अधिकारी गुरसिमरन वीर सिंह ने बताया कि साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला धारा 318(4), 61(2) बीएनएस और धारा 66 आईटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर की जांच कर रही है जिससे महिला को कॉल की गई थी। फोन में डाउनलोड किए गए एप और बैंक खाते से हुई ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान के लिए साइबर तकनीकी टीम की मदद ली जा रही है।
पुलिस की एडवाइजरी
-किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, एटीएम/डेबिट कार्ड की जानकारी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी न दें।
-किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध मोबाइल एप डाउनलोड न करें।
-क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि भुगतान किसे किया जा रहा है।
-गूगल या सोशल मीडिया पर मिले किसी संदिग्ध कस्टमर केयर नंबर पर भरोसा न करें।
-वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाने वाले लोगों से सावधान रहें। पहचान और दावे का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करें।
-ऑनलाइन नौकरी, निवेश, लोन, केवाईसी अपडेट या रिफंड के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें।
-किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना मोबाइल स्क्रीन शेयर न करें और रिमोट-एक्सेस एप इंस्टॉल न करें।
-पैसे भेजने से पहले परिवार के सदस्य या संबंधित संस्था से अलग माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें।
साइबर एक्सपर्ट की सलाह
ऑनलाइन ठगी के मामलों की जांच सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में कहीं अधिक जटिल होती है। साइबर अपराधी ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते, फिर वॉलेट, यूपीआई और अन्य खातों में तेजी से ट्रांसफर कर देते हैं। कई मामलों में रकम देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंच जाती है। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसे की पूरी ट्रेल को समय रहते पकड़ना और रकम को फ्रीज कराना होती है। साइबर ठगी में सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी सफलता नहीं है। असली सफलता पूरी मनी ट्रेल पकड़ने, रकम फ्रीज कराने, पीड़ित को पैसा वापस दिलाने और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में है। बड़े साइबर गिरोहों की जांच में अक्सर एक से ज्यादा राज्यों की पुलिस शामिल होती है। इसलिए संयुक्त जांच टीम और राज्यों के बीच तेज समन्वय जरूरी है। आईवाईसी ने साइबर अपराध के हॉटस्पॉट और मल्टी-ज्यूरिडिक्शन मामलों के लिए ज्वाइंट साइबर कोऑर्डिनेशन टीमों की व्यवस्था भी की है।
मोहिंदर सिंह, रिटायर्ड साइबर एक्सपर्ट मोहाली