जाटों को जाति के आधार पर ही आरक्षण मिलना चाहिए। यह उनका हक है, क्योंकि दलितों की तरह जाटों ने भी काफी भेदभाव बर्दास्त किया है।
यह कहना था राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बीरेंद्र सिंह का। वह सेक्टर-छह स्थित जाट भवन में मंगलवार को आयोजित सर छोटू राम के 133 वें जन्म दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए थे।
इस दौरान सर छोटू राम जाट भवन पंचकूला में दीनबंधु सर छोटू राम की मूर्तियों का अनावरण भी किया गया और उनकी जीवन गाथा व सिद्धांतों पर आधारित ‘स्मारिका’ व जाट सभा के कार्यक्रमों के ‘वार्षिक कलेंडर’ का विमोचन भी किया गया।
इसके अलावा देश की सुरक्षा, स्वायत्तता एवं अखंडता के लिए प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
बीरेंद्र सिंह ने सर छोटू राम की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने दलितों, गरीबाें, शोषितों के कल्याण में पूरी जिंदगी लगा दी। सर छोटूराम ने ही सबसे पहले किसानों के कर्ज माफ किए थे।
आज भी उनकी नीतियों व बातों पर अमल करने की आवश्यक्ता है।
वहीं, जाट सभा चंडीगढ़/पंचकला के प्रधान रिटायर्ड आईएएस डा. एमएस मलिक ने कहा कि जाटों की उन्नति सर छोटूराम के पद चिह्नों पर चलने से ही संभव है।
जाट कोई जाति नहीं बल्कि खेतीबाड़ी से जुड़ा हुआ एक समुदाय है। देश के लिए कुर्बानियों का 50 प्रतिशत केवल इस समुदाय से हैं, जबकि केंद्रीय प्रशासनिक सेवाओं में इस वर्ग का केवल दो प्रतिशत हिस्सा है।
जाट आरक्षण संघर्ष समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया ने कहा कि सर छोटू सदैव नारी सशक्तिकरण के पक्षधर रहे हैं। सभी को नारियों का सम्मान करना चाहिए।