चंडीगढ़। डड्डूमाजरा के 70 प्रतिशत किसानों की मुआवजा राशि भूमि अधिग्रहण विभाग ने न्यायालय में जमा करा दी है। इसको लेकर किसानों में रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि विभाग खुलेआम भूमि अधिग्रहण अधिनियम (2013) की धज्जियां उड़ा रहा है। विभाग की कार्रवाई तुगलकी है। किसानों ने विभाग की मनमानी के खिलाफ न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी दी है।
पीआर 4 लिंक रोड के लिए प्रशास की ओर से धनास और डड्डूमाजरा के किसानों की 17.76 एकड़ भूमि 69 करोड़ रुपये में अधिग्रहित की गई है। इसमें धनास में प्रति एकड़ 5.25 करोड़ जबकि डड्डूमाजरा में प्रति एकड़ 3.22 करोड़ का मुआवजा दिया जा रहा है। धनास के 17 और डड्डूमाजरा के 92 किसानों की जमीन को अधिग्रहित किया गया है। धनास के मुुकाबले डड्डूमाजरा के किसानों की मुआवजा राशि काफी कम है, जिसका लोग विरोध कर रहे हैं।
विरोध के कारण डड्डूमाजरा के 70 प्रतिशत किसानों ने ट्रेजरी से मुआवजे की राशि नहीं ली और लगातार मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग कर रहे थे। ऐसे में भूमि अधिग्रहण विभाग ने बची हुई मुआवजा राशि को न्यायालय में जमा करा दिया है। इसको लेकर जमीदारों में खासा आक्रोश है। विभाग के कानूनगो मक्खन सिंह ने बताया कि किसानों द्वारा मुआवजे की राशि नहीं ली जा रही थी, इस कारण से पैसा न्यायालय में जमा कराया गया है। विभाग नियम पूर्वक ही कार्य कर रहा है।
भूमि अधिग्रहण की अनदेखी कर रहा विभाग
चंडीगढ़ का भूमि अधिग्रहण विभाग वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम की अनदेखी कर रहा है। अधिनियम में यह उल्लेख है कि यदि किसान एक वर्ष तक मुआवजे की राशि नहीं लेता है तब विभाग मुआवजा राशि को न्यायालय में जमा कराएगा, लेकिन यहां विभाग ने दो महीने के बाद ही मुआवजे की राशि को न्यायालय में जमा करा दिया, जो न्यायोचित नहीं है। विभाग की इस मनमानी के खिलाफ न्यायालय की शरण ली जाएगी।
-कुलजीत संधू, पूर्व सरपंच, धनास
किसानों के हित में कार्य नहीं कर रहे राजनीतिक दल
चंडीगढ़ शहर में वैसे ही ग्रामीण क्षेत्र समाप्त किए जा रहे हैं। किसानों की जमीन को बचाने के लिए कोई भी राजनीतिक दल सामने नहीं आ रहा है। सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता अफसरों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। इसका जवाब किसान आने वाले चुनाव में अवश्य देंगे।
-साधु सिंह, पूर्व सरपंच, सारंगपुर