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पीयू के छात्रावासों में शोधार्थियों को मिला प्रवेश

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रावासों में आखिरकार उन शोधार्थियों को प्रवेश मिल गया, जो कई दिन से अपने घरों पर गए हुए थे। इसके अलावा प्रयोगशालाएं भी उन शोधार्थियों के लिए खोल दी गईं, जिनका शोध आखिरी चरण में था। पुस्तकालय दूसरे दिन भी खोला गया। इस दौरान कुछ छात्रों को प्रवेश मिला, लेकिन विरोध हुआ तो सभी को अंदर बुलाया गया। इन मांगों पर पीयू की ओर से काम किए जाने का श्रेय एसएफएस व एबीवीपी दोनों ले रही हैं। एसएफएस कई दिन से धरना दे रही है। वहीं एबीवीपी ने मांग पत्र अधिकारियों को देकर धरना दिया है।
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पीयू के शोधार्थी कोरोना के कारण अपने घर चले गए थे, लेकिन जैसे ही कोरोना कम हुआ तो वे वापस छात्रावास में पहुंचे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। इसे लेकर शोधार्थियों ने प्रदर्शन किया और यह कई दिन तक चला।
शुक्रवार को इन शोधार्थियों को प्रवेश मिल गया। इससे वे खुश नजर आए। छात्रों ने कहा है कि नए विद्यार्थियों के लिए भी छात्रावास खोले जाएं। इसके अलावा शोधार्थी प्रयोगशालाएं खोलने की मांग पर भी अड़े थे। उनका कहना था कि कई दिनों से उनका शोध प्रयोगशालाएं न खुलने के कारण प्रभावित हो रहा है। इसे लेकर भी प्रदर्शन हुआ। पीयू ने इसके भी रास्ते खोलना शुरू कर दिया। हालांकि विद्यार्थी अड़े हैं कि सभी शोधार्थियों और परास्नातक के विद्यार्थियों के लिए भी प्रयोगशालाएं खोली जाएं।
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पुस्तकालय वीरवार को खुला, लेकिन इस दौरान कुछ ही शोधार्थियों को प्रवेश दिया गया। वहीं शुक्रवार को विद्यार्थी पुस्तकालय पहुंचे, तो वहां केवल शोधार्थियों को ही प्रवेश दिया जा रहा था। छात्रों ने इस बात का विरोध किया। काफी देर बाद सभी छात्रों को प्रवेश दिया गया, लेकिन इसके लिए आधिकारिक आदेश जारी नहीं हो सके। विद्यार्थियों ने कहा है कि सभी छात्रों को पुस्तकालय में दाखिला नहीं दिया गया तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे।
एसएफएस का आरोप- छात्र जबरन महिला छात्रावास में घुसे
एसएफएस ने सेक्टर-11 थाने में शिकायत दी है। इसमें कहा है कि महिला छात्रावास नंबर दो में एबीवीपी के कुछ कार्यकर्ता घुस गए और विरोध के बाद भी नहीं निकले। पीयू के अधिकारियों के साथ वह बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जहां तक छात्र पहुंचे, वहां तक छात्राओं के अभिभावकों को भी जाने की इजाजत नहीं है। कमरों में घुसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाए। वहीं दूसरी ओर एबीवीपी का तर्क है कि उन्होंने शोधार्थी को प्रवेश देने के लिए अधिकारियों से मांग की थी। अधिकारियों ने ही बात करने के लिए उन्हें वहां बुलाया था।
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