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Chandigarh News: मासिक धर्म की छुट्टी लागू करने से पहले शोध जरूरी

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चंडीगढ़।
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पंजाब यूनिवर्सिटी में कानून विभाग के विद्यार्थियों की ओर से संस्थान में मासिक धर्म की छुट्टी को लेकर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें करीब 70 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसमें 60 प्रतिशत लड़कियां और 40 प्रतिशत लड़के थे। चर्चा के दौरान 20 प्रतिशत युवाओं ने प्रति सेमेस्टर तय संख्या में मासिक धर्म छुट्टी देने का विरोध किया। उनका पक्ष था कि पीरियड की छुट्टी को कैसे तय किया जाएगा। हर किसी की पीरियड के दौरान तबीयत खराब नहीं होती। अगर कोई झूठ बोलकर छुट्टी लेता है तो यह लड़कों के साथ अन्याय होगा। वहीं, 80 प्रतिशत युवा प्रति सेमेस्टर तय संख्या में छुट्टी के पक्ष में दिखे।
युवा छात्रों ने सुझाव दिया कि मासिक धर्म छुट्टी को पीयू में लागू करने से पहले इस पर अच्छे से शोध होना चाहिए कि छुट्टी कितनी और कैसे व किन हालातों में दी जाएगी।
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चर्चा के दौरान एक युवक ने कहा कि महिलाओं में पीरियड एक नियमित प्रक्रिया है। एशियन गेम्स में अधिकांश महिला खिलाड़ियों ने गोल्ड जीता है, इसका मतलब वे पीरियड में भी शारीरिक काम कर रही हैं। वहीं, एक अन्य युवक ने कहा कि संस्थानों में मासिक धर्म छुट्टी महिलाओं को नौकरी पर रखने और वर्क कल्चर को प्रभावित करेगी।
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ये कैसे निर्धारित किया जाएगा कि अगर किसी महिला के पीरियड बंद (रजोवृत्ति) हो गई है तो उसे छुट्टी नहीं दी जाएगी। इस दौरान पक्ष में बोलने वाले लड़के और लड़कियों ने कहा कि अधिकांश महिलाओं में वर्तमान में पीरियड के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ रही हैं। शरीर में दर्द, कमजोरी और मानसिक तनाव के कारण काम करने में असमर्थता होती है। ऐसे में महिलाओं को अपने स्तर पर ही अभी तक छुट्टी लेनी पड़ रही है। अधिकांश महिलाओं को समस्या के बावजूद मजबूरी में काम करना पड़ता है क्योंकि उनके इस मुद्दे पर चर्चा ही नहीं होती है। मासिक धर्म छुट्टी लैंगिक समानता का मुद्दा नहीं है।
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