चंडीगढ़। पीयू में वीरवार को पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव हुए। इसमें अमरजीत सिंह नौरा ने अध्यक्ष, मृत्युंजय कुमार ने महासचिव और सुमन ने उपाध्यक्ष के पद पर बाजी मारी। वहीं, संयुक्त सचिव के पद पर सुरिंदर पाल सिंह और कोषाध्यक्ष के पद पर विशाल शर्मा ने कब्जा किया। सुबह 8.30 बजे से लॉ ऑडिटोरियम में मतदान शुरू हुआ जो दोपहर 2 बजे तक चला। इसके बाद काउंटिंग हुई और 4.45 बजे के बाद उम्मीदवारों के चयन का परिणाम सामने आया। इस बार चुनाव में काफी करीबी मुकाबला रहा। अध्यक्ष पद के लिए डॉ. अमरजीत नौरा ने रतन सिंह को छह, महासचिव मृत्युंजय ने कश्मीर सिंह को दो, उपाध्यक्ष सुमन सुमी ने 30 मतों से जीत दर्ज की।
इस बार चुनाव मैदान में तीन ग्रुप अशोक-कुलविंदर, प्रोफेसर केशव की ओर से संचालित नौरा-मृत्युंजय और प्रोफेसर नवदीप की ओर से संचालित रतन-कश्मीर थे। पुटा चुनाव में नौरा-मृत्युंजय और रतन-कश्मीर के उम्मीदवारों ने मिलकर पूरे पुटा पैनल को बनाया है, क्योंकि दोनों गुटों को एकतरफा जीत हासिल नहीं हुई। खास बात यह है कि इस बार चुनाव कांग्रेस-भाजपा और वीसी के पक्ष व विरोध के बजाय शिक्षकों के मुद्दों पर केंद्रित रहा। 11 साल बाद पुटा चुनाव में वापसी करने वाले प्रो. नवदीप गोयल ने पुटा पैनल में 12 उम्मीदवारों को जीत दिलाई। इससे पहले प्रो. नवदीप गोयल ने सत्र 2001-2002 में महासचिव और 2011-12 में उपाध्यक्ष पर जीत दर्ज की थी। वहीं, पिछले सात साल से लगातार अधिकांश पैनल में जीत दर्ज कर करवाने वाले प्रो. केशव मल्होत्रा के सिर्फ सात उम्मीदवार ही पुटा में चुनकर आए। अध्यक्ष नौरा, सचिव मृत्युंजय और संयुक्त सचिव सुरिंदर पाल केशव मल्होत्रा ग्रुप के उम्मीदवार हैं। तीसरे ग्रुप अशोक-कुलविंदर की टीम पहली बार मैदान में उतरी थी और बेहतरीन प्रदर्शन किया। अधिकांश उम्मीदवारों ने सौ के करीब मत हासिल किए। पुटा चुनाव में 592 में से 553 सदस्यों ने मतदान किया।
अशोक-कुलविंदर खेमे की अन्य उम्मीदवारों से गहमागहमी, वोटिंग स्थल से सभी को दूर रखा
पहली बार पीयू में पुटा चुनाव के दौरान वोटिंग स्थल से उम्मीदवारों को दूर रखा गया। इस बार लॉ ऑडिटोरियम के बाहर ही उम्मीदवार शिक्षकों से मेल मिलाप कर रहे थे। वोटिंग स्थल के बाहर शिक्षकों से मिलने को लेकर अशोक-कुलविंदर खेमे की सुबह अन्य उम्मीदवारों से गहमागहमी भी हो गई थी। इसके बाद सभी उम्मीद्वारों को वोटिंग स्थल से दूर बैठाया गया। इनका कहना था कि उम्मीदवार वोट देने आने वाले शिक्षकों को प्रभावित करते हैं। वहीं रिटर्निंग अफसर की ओर से भी चुनाव के बाद सेवानिवृत्त शिक्षकों को मतदाता सूची में शामिल करने पर आपत्ति जताई थी।
जानें... किस उम्मीदवार कितने वोट, कौन जीता
अध्यक्ष
उम्मीदवार - विभाग - मत और परिणाम
अमरजीत सिंह नौरा - बायोकैमिस्ट्री - 237 जीते
रतन सिंह - यूआईएलएस - 229 हारे
अशोक कुमार - हिंदी - 81 हारे
उपाध्यक्ष
उम्मीदवार - विभाग - मत और परिणाम
सुमन सुमी - एसी जोशी लाइब्रेरी - 236 जीतीं
तनजीर कौर - बायोफिजिक्स - 206 हारे
हरमैल सिंह - सीडीओई - 95 हारे
महासचिव
उम्मीदवार - विभाग - मत और परिणाम
मृत्युजंय कुमार - एसी जोशी लाइब्रेरी - 223 जीते
कश्मीर सिंह - बायोटेक्नोलॉजी - 221 हारे
कुलविंदर सिंह - यूबीएस - 95 हारे
संयुक्त सचिव
उम्मीदवार - विभाग - मत और परिणाम
सुरिंदर पाल सिंह - गणित - 223 जीते
माधुरी रिषी - पर्यावरण अध्ययन - 196 हारे
विनोद कुमार - समाजशास्त्र - 113 हारे
कोषाध्यक्ष
उम्मीदवार - विभाग - मत और परिणाम
विशाल शर्मा - फॉरेंसिक साइंस - 266 जीते
जगेत सिंह - यूआईईटी - 106 हारे
नीरज अग्रवाल - यूआईएचटीएम - 170 हारे
एग्जीक्यूटिव सदस्यों में इन्होंने मारी बाजी
एग्जीक्यूटिव ग्रुप -1 में रतन-कश्मीर गुट की दीप्ति गुप्ता और गौरव कलोत्रा, नौरा-मृत्युजंय गुट के गौतम बहल और नीतिन अरोड़ा ने जीत दर्ज की। एग्जीक्यूटिव ग्रुप-2 में रतन-कश्मीर गुट के पूरे पैनल कविता तनेजा, नवीन कौशल, एमसी सिद्धू और नवदीप गोयल ने जीत दर्ज की। एग्जीक्यूटिव ग्रुप- 3 में रतन-कश्मीर गुट की अनुपम बाहरी, जगजीत सिंह और नरेश कुमार, नौरा-मृत्युजंय गुट के दीपक गुप्ता विजेता रहे। एग्जीक्यूटिव ग्रुप- 4 में नौरा-मृत्युजंय गुट के केशव मल्होत्रा और एग्जीक्यूटिव ग्रुप-5 में रतन -कश्मीर गुट के परवीन कुमार ने निर्विरोध चुनाव में जीत हासिल की।
कोट्स
नौरा गुट ने पूरा नहीं किया शिक्षकों का वादा, नई टीम को मिला मौका
पिछली बार नौरा गुट की ओर से शिक्षकों के साथ किए वायदों पर काम नहीं किया गया और प्रो केशव मल्होत्रा भी टीम पर अधिक हावी रहे। इस कारण शिक्षकों ने इस बार नई टीम को मौका दिया है।
- प्रो नवदीप गोयल, रतन-कश्मीर गुट
शिक्षकों के साथ किए वायदों पर करेंगे काम
इस बार केशव मल्होत्रा टीम की ओर से सातवीं बार पुटा में जीत दर्ज की गई है। हालांकि इस बार पैनल नहीं जितवा पाए, क्योंकि विरोध में शिक्षकों के दो गुट चुनाव लड़ रहे थे। वहीं, इस बार हमारी टीम की ओर से कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया गया, जिसकी स्वीकार्यता बनने में थोड़ा समय लगता है। शिक्षकों की ओर से किए गए वायदों पर काम किया जाएगा।
- डॉ. मृत्युजंय, महासचिव, पुटा