बच्ची को कमरे में बंद कर चला जाता था काम पर
ये कहानी है 6 साल की बच्ची की, जिसे उसका पिता कमरे में बंद करके चला जाता था। वह अकेली रोती-बिलखती रहती, पिता से इसकी वजह पूछी गई तो जानते हैं क्या बोला वो। सुनिए...
मामला हरियाणा के यमुनानगर का है। बच्ची के पिता ने बताया कि उसकी मां की मौत हो गई है, तो उसकी जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। समाज में पनप रही कुरीतियों को देखकर डर लगता है। पिता डरा व सहमा हुआ था। क्योंकि नन्ही सी जान एक मासूम बच्ची है ऐसे में उसे सुरक्षित रखना बहुत जरूरी था। पिता ने दिल पर पत्थर रख अपने दिल के टुकड़े को समाज की नजरों से दूर रखने का फैसला किया।
ऐसा कदम उठाया, जिसने उसे समाज की नजरों में गिरा दिया। बेशक समाज की नजर में यह गलत था, लेकिन पिता का कहना है कि उसने यह सब अपनी बच्ची की सुरक्षा के लिए किया। हम बात कर रहे हैं जगाधरी वर्कशॉप के फर्कपुर की। जहां एक पिता बच्ची को मकान में बंद कर अपने काम पर चला जाता था।
भूखी न रहे इसलिए खाना और मनोरंजन के लिए चलता था दिनभर टीवी
फर्कपुर में रहने वाले पिता ने बताया कि वह शहर के एक होटल में वेटर का काम करता है। वह बेटी को अकेला छोड़कर इसलिए जाता था, क्योंकि वह काम पर अपने साथ नहीं रख सकता था। क्योंकि बच्ची काफी छोटी है। इसलिए उसने बेटी की भलाई के लिए वह काम पर जाने से पहले हर रोज उसके खाना, दूध व मनोरंजन के लिए टीवी का बंदोबस्त करके जाता था।
वापस आने के बाद वह उसके लिए खाने की अन्य वस्तुएं भी लेकर आता था। पिता का यह भी कहना था कि बच्ची की मां के चले जाने के बाद जिम्मेदारी उस पर आ गई थी। घर में बच्ची और उसके बिना तीसरा कोई नहीं था। ऐेस में बच्ची की कोई ओर जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं था। इसलिए उसे इस तरह का कदम उठाना पड़ा।
मकान से बच्ची के रोने की आवाज आई तो खुला राज
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बंद मकान में बच्ची काफी समय से रही थी। यहां तक आसपास के लोगों को भी इसके बारे में नहीं पता था। सोमवार देर शाम गली से गुजर रहे व्यक्ति को अंदर से चिल्लाने की आवाज आई। उसने मकान की तरफ देखा तो बच्ची गेट के नीचे से झांक और रो रही थी। जबकि मकान का ताला भी बाहर लगा हुआ था।
बार-बार बच्ची मुझे बाहर निकालो के लिए बोल रही थी। इसके बाद व्यक्ति ने आसपास के लोगों को इसके बारे में जानकारी दी। जिसके बाद वहां लोगों का तांता लग गया। इसी दौरान किसी ने चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट को फोन किया और टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद यूनिट ने रेस्क्यू किया।
बच्ची बोली, मारते थे पापा
बंद कमरे में खुली खिड़की से मासूम बच्ची ने मदद तो मांगी साथ ही वह बार-बार यह बोल रही थी। उसे बाहर निकाला, क्योंकि पापा मारते हैं। लोगों को देखकर बच्ची कभी कमरे की खिड़की तो कभी गेट पर लगी फाइबर के टूटे टुकड़े से बने हॉल से झांक कर बार-बार बाहर निकालने की गुहार लगा रही थी। पड़ोसियों ने तुरंत फर्कपुर पुलिस को बुलाया और पुलिस की मौजूदगी में गेट का ताला तोड़ा। इतनी देर में चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट की टीम भी पहुंच गई।
पहले भी बच्ची रह चुकी बालकुंज में
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रेस्क्यू टीम के अनुसार बच्ची डेढ़ माह पहले छछरौली स्थित बालकुंज में रह चुकी है। उस दौरान पिता उसे इसी तरह से कमरे में बंद रखता था और उसके साथ मारपीट भी करता था। पिता की आदतों को देखकर उसे बालकुंज भी दिया गया था। वहीं मंगलवार को फिर से बच्ची को रेस्क्यू कर बंद कमरे से बाहर निकाला और मेडिकल करवाकर बालकुंज भेज दिया गया है।
पिता की ओर से बच्ची को कमरे में बंद रखने की सूचना मिली थी। मौके पर जाकर देखा बच्ची कमरे में बंद थी और वह डरी व सहमी हुई थी। वह बार-बार यही कह रही थी पापा मारते हैं, उसे बाहर निकालो। इसके बाद उसे बंद मकान से बाहर निकाला। बच्ची का पिता किसी होटल में वेटर का काम करता है जो काम पर जाने से पहले बच्ची को मकान में लॉक कर चला जाता था। बच्ची का मेडिकल सही है और उसे छछरौली बालकुंज में सुरक्षित भेज दिया गया है।
-ऋचा बुद्धिराजा, जिला चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ऑफिसर, यमुनानगर