पानी पर रिसर्च करने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। पीयू में एक्स-रे फोटो इलेक्ट्रोन व वाटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम लगने जा रहा है। इन दो उपकरणों के जरिये पानी पर रिसर्च हो सकेगी। इसके लिए पीयू की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे केंद्र सरकार मंजूरी देगी। इन मशीनों के अलावा एक दर्जन अन्य मशीनें भी पीयू की सैफ लैब के जरिये खरीदी जाएंगी जो रिसर्च को और आसान बनाएंगी।
देशभर में 13 सैफ लैब हैं। इनमें से पंजाब विश्वविद्यालय की सैफ लैब अत्याधुनिक है। यहां रिसर्च स्कॉलर को अधिकांश सुविधाएं मिल जाती हैं। रसायनों की जांच आदि यहां की जाती है। देशभर से जांच के लिए यहां नमूने आते हैं। रिसर्च स्कॉलर, शिक्षक व इंडस्ट्री से हर साल 13 से 14 हजार नमूने जांच को आते हैं। इससे पीयू की आय भी बढ़ रही है। डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक पीयू यहां से कमा रहा है। धीरे धीरे लैब का विस्तार किया जा रहा है।
इसी क्रम में वीसी प्रो. राजकुमार के आदेश पर पिछले साल पीयू ने केंद्र सरकार से दो दर्जन उपकरणों के लिए प्रस्ताव भेजा था। पिछले साल दिल्ली में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक हुई। सूत्रों का कहना है कि नए उपकरण खरीद के लिए कमेटी ने प्रस्ताव पास कर दिया। यह प्रस्ताव लगभग 19 करोड़ का है। सूत्रों का कहना है कि पानी की मशीन के प्रस्ताव को अब आगे बढ़ाया जा रहा है।
विद्यार्थी लेंगे प्रशिक्षण
पिछले साल कश्मीर विश्वविद्यालय से आए 60 विद्यार्थियों ने रसायनों की जांच करना सीखा था। अब अलग-अलग विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को बुलाकर उन्हें जांच का प्रशिक्षण दिए जाने की योजना है। इससे विद्यार्थियों के काम आसान हो सकेंगे। साथ ही जरूरत पड़ने पर लैब में जाकर वह खुद भी अपने नमूनों की जांच कहीं भी कर सकेंगे।
इन उपकरणों को मिली थी मंजूरी
- एक्स-रे फोटो इलेक्ट्रोन
- स्पेक्ट्रोस्कॉपी
- सिंगल मोलिक्यूल एक्स-रे
- वाइब्रेटिंग सैंपल
- मैग्नेटोमीटर
- नैनो इंडेंटर
- जेटा पोटेंशियल
- इलेक्ट्रो केमिकल वर्क स्टेशन
- स्पेक्ट्रोस्कॉपिक इलिप्सोमीटर
आयरन, तांबा, आर्सेनिक का लग जाएगा पता
पानी में कई तत्व होते हैं जो शरीर के लिए जरूरी भी होते हैं, लेकिन जब इनकी अधिकता हो जाती है तो इससे शरीर को नुकसान होता है। आर्सेनिक सबसे खतरनाक होता है। इसकी जांच वाटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम से हो जाएगी। पानी में इन तत्वों का पता लगाने के लिए रिसर्च स्कॉलर नमूनों की जांच कराते हैं, लेकिन उपकरणों के अभाव के कारण उन्हें दिक्कतें होती है।
बताया जाता है कि यह सिस्टम हर दिन में 90 से 110 नमूनों की जांच कर सकेगा। एक्स-रे के जरिये भी पानी के इन तत्वों का पता लग जाएगा। साथ ही ठोस पदार्थों की जानकारी भी मिल जाएगी। एलिप्सोमीटर से माइक्रोन की फिकनेस का पता किया जा सकेगा। इस पर जल्द ही पीयू कार्रवाई करके प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।