हरियाणा गठन के बाद पहली बार हुए चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर राव इंद्रजीत सिंह के पिता पूर्व मुख्यमंत्री राव बिरेंद्र की बहन सुमित्रा देवी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीती थीं। उन्होंने भारतीय जनसंघ की टिकट पर चुनाव लड़ रहे कैप्टन अजय यादव के पिता राव अभय सिंह को 5 हजार वोटों से हराया था। 1968 में भी सुमित्रा यादव रेवाड़ी सीट से जीती, वहीं राव अभय तीसरे नंबर पर पहुंच गए। लेकिन 1972 के चुनाव में राव अभय सिंह ने राव बिरेंद्र की विशाल हरियाणा पार्टी के उम्मीदवार को हराया।
1982 में आज तक एक बार निर्दलीय जीत
रेवाड़ी सीट पर अब तक हुए चुनाव में महज एक बार 1982 में कर्नल राम सिंह निर्दलीय चुनाव जीते हैं। रेवाड़ी सीट का इतिहास रहा है कि पहली बार चुनाव मैदान में उतरने वाले निर्दलीय उम्मीदवार को रेवाड़ी की जनता ने जीत के करीब जरुर पहुंचाया है।
भाजपा प्रत्याशी सुनील यादव
मजबूत पक्ष : राव इंद्रजीत समर्थक होना है। प्रदेश नेतृत्व के न चाहते हुए भी राव इंद्रजीत बेटी को टिकट नहीं मिलने पर उनको टिकट दिलाने में कामयाब रहे।
कमजोर पक्ष: राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों से दूरी व लोगों से जुड़ाव नहीं। पहली बार किसी चुनाव में उतरे हैं। पूरी तरह से राव इंद्रजीत पर निर्भर हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी चिरंजीव राव
मजबूत पक्ष : रेवाड़ी विधानसभा सीट पर चिरंजीव के दादा राव अभय सिंह एक बार व उनके पिता कैप्टन अजय यादव 6 बार लगातार विधायक रहे हैं।
कमजोर पक्ष : चिरंजीव राव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। पिता के कार्यकाल के दौरान लोगों से दूरी व लोगों से सीधा जुड़ाव नहीं होना कमजोर पक्ष है।
निर्दलीय प्रत्याशी रणधीर सिंह कापड़ीवास
मजबूत पक्ष : लगातार पांच विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 2014 के विस चुनाव में भाजपा की टिकट पर 80 हजार से ज्यादा मत लेकर विधायक बने। लोगों से सीधा जुड़ाव।
कमजोर पक्ष : वर्षों से राजनीतिक में होने के बावजूद कोई भी गॉड फादर नहीं होना उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है।