सिटी ब्यूटीफुल ग्रीन सिटी के नाम से जानी जाती है, लेकिन चंडीगढ़ का यही गहना अब कम होने लगा है। पर्यावरण मंत्रालय की भारतीय वन सर्वेक्षण 2015 की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ की हरियाली में गिरावट दर्ज की गई है।
लेटेस्ट रिपोर्ट ने बताया है कि चंडीगढ़ में ट्री कवर एरिया यानी पेड़ों का क्षेत्रफल करीब नौ वर्ग किलोमीटर में है। चंडीगढ़ का भौगोलिक एरिया 114 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
कुल एरिया के हिसाब से ट्री कवर एरिया 7.80 प्रतिशत है। प्रतिशत के हिसाब से चंडीगढ़ भले ही पूरे देश में चौथे नंबर पर है, लेकिन जब पिछले रिकार्ड पर नजर जाती है तो पता चलता कि पिछले छह सालों में हरियाली में गिरावट आ रही है।
किस साल कितना रहा पेड़ों का क्षेत्रफल
साल----कुल एरिया---ट्री कवर एरिया----प्रतिशत
2009----114----11----9.65
2011---- 114----10----8.93
2013----14----10------8.51
2015----114----09-----7.80
(नोट : एरिया वर्ग किलोमीटर में है।)
कौन है देश में नंबर वन
स्टेट/यूटी----कुल एरिया---ट्री कवर एरिया--प्रतिशत
लक्ष्यदीप---32------4-----12.40
दमन एंव दीव---112----10----9.18
गोवा-----3702------325-----8.78
चंडीगढ़----114------9-----7.80
...लेकिन फारेस्ट एरिया में बढ़ोतरी दर्ज की गई
रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ के कुल फारेस्ट एरिया में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2013 के मुकाबले 4.77 वर्ग किलोमीटर में वृद्धि हुई है। दो साल में सघन वन क्षेत्र का रकबा जस का तस रहा, लेकिन सामान्य वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है। साल 2013 में सामान्य वन क्षेत्रफल 9.66 वर्ग किलोमीटर था, जबकि साल 2015 की बढ़कर 14.09 बढ़ गया है। इस प्रकार से फारेस्ट एरिया में बढ़ोतरी हुई है।
शहरी इलाकों में काटे जा रहे पेड
पिछले छह साल के भीतर सिर्फ सेक्टर 17 में 200 से ज्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं। पेड़ों की कटाई के बाद यहां पर फ्लाईओवर व मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण हुआ। इस दौरान कई स्कूलों का निर्माण हुआ है। उन जगहों पर भी पेड़ों का कटाव हुआ है। सारंगपुर में चंडीगढ़ की रिजर्व बटालियन का निर्माण हुआ। उस दौरान भी काफी पेड़ काटे गए थे। इसके अलावा हर साल बीमारी की वजह से पेड़ गिर जाते हैं।
बीरेंद्र चौधरी, डिप्टी कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट चंडीगढ़ ने बताया कि चंडीगढ़ में पौधे लगाने का जो भी लक्ष्य है, उसे हर साल पूरा किया जाता है। यदि एक पेड़ कटता है तो उसके बदले में पांच गुना पौधे लगाए जाते हैं। चंडीगढ़ में नान फारेस्ट लैंड पर विकास हुआ है। इसमें कुछ पेड़ भी काटे गए हैं। उनके बदले नए पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें बड़े होने में समय लगेगा।