अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने जिला योजना समिति संशोधन किया है। इसके तहत अब समिति में प्रख्यात अर्थशास्त्री और योजना में अनुभव रखने वाले एक पेशेवर को भी शामिल करना होगा। इसके साथ ही लोकसभा और राज्यसभा के सांसद व विधायक सिर्फ एक जिले की समिति के सदस्य बन सकेंगे। इस संबंध में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त व सचिव विकास गुप्ता की ओर से सोमवार को अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
निकाय विभाग की ओर से हर जिले में जिला योजना समिति गठित की जाती है। इसका मुख्य कार्य शहर के विकास एक प्रारूप तैयार करना होता है। जिले के विकास योजनाओं को तैयार करने और और उनके लिए बजट का प्रावधान करने में भी इस समिति का सहयोग लिया जाता है। पहले इस समिति में जनप्रतिनिधि व अफसर शामिल किए जाते थे लेकिन यह पहली बार है जब इस समिति अर्थशास्त्री और योजना के जानकार लोगों को शामिल किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि इन दो लोगों को शामिल करने का मकसद विकास योजनाओं की दूरगामी प्लानिंग, समुचित बजट और उसे लागू करना है। निकाय विभाग के मुताबिक 25 सदस्यीय कमेटी में पांच सदस्य राज्य सरकार मनोनीत करेगी। इस कमेटी में संबंधित जिले का उपायुक्त, अपर उपायुक्त, जिला नगर योजनाकार, जिला नगर पालिका आयुक्त, प्रख्यात अर्थशास्त्री और योजना में अनुभव रखने वाले पेशेवर एक व्यक्ति शामिल होगा।
वहीं, जिन शहरों में 20 सदस्यीय कमेटी का गठन होगा, उनमें चार सदस्यों को राज्य सरकार नामित करेगी। इनमें उपायुक्त, अपर उपायुक्त, जिला नगर योजनाकार और जिला नगर आयुक्त शामिल होंगे। इनमें या तो एक अर्थशास्त्री होगा या फिर एक योजना में अनुभव रखने वाला प्रोफेश्न सदस्य।
सांसद व विधायक को एक कमेटी चुनने का विकल्प होगा
राज्यसभा व लोकसभा सांसद के कार्यक्षेत्र में एक से ज्यादा जिले आते हैं। ऐसे में इन्हें सिर्फ एक जिले की कमेटी का चुनाव करने का विकल्प रहेगा। सांसद व विधायक समिति के बैठकों में विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। निकाय विभाग के मुताबिक जिन सांसद व विधायकों के निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक जिले आते हैं तो उन्हें सिर्फ एक समिति का चुनने का विकल्प होगा। इसके साथ जिला योजनाओं को तैयार करने में सहायता करने वाले जिला अधिकारियों को समिति में सलाहकार के रूप में मनोनीत किया जा सकता है।