चंडीगढ़। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया। इस मौके पर सेक्टर-16 के गांधी स्मारक भवन में गांधी स्मारक निधि ने चंडीगढ़ प्रशासन के सांस्कृतिक विभाग के सहयोग से विशेष श्रद्धांजलि सभा करवाई।
इस सभा में पूर्व सांसद और एडिशनल सॉलिसिटर सत्यपाल जैन मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित हुए। भारतीय स्टेट बैंक के उप महाप्रबंधक संजय कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता गांधी स्मारक निधि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष संजय सिंह ने की।
उन्होंने कहा कि विकेंद्रीकरण अर्थात हमें स्वदेशी अपनाना चाहिए। हमें गांव की ओर जाना चाहिए। ग्राम स्वराज के लिए हम लोगों को कुछ न कुछ करना चाहिए। समभाव व सद्भाव के संदेश को मजबूत करें, तभी भारत एक राष्ट्र के रूप में मजबूत होगा। विशिष्ट अतिथि के तौर पर संजय कुमार उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक ने गांधी स्मारक भवन की पुस्तकालय को फर्नीचर के लिए पांच लाख 22 हजार रुपये दान में दिए। उनके सहयोग से एक बेहतरीन पुस्तकालय का निर्माण हो सकेगा।
गांधी स्मारक भवन के निदेशक डॉ. देवराज त्यागी ने उपस्थित लोगों का स्वागत और डॉ. एमपी डोगरा ने सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम का संचालन पापिया चक्रवर्ती ने किया। कार्यक्रम में सबसे पहले दो मिनट का मौन धारण करने के बाद उनकी प्रतिमा पर फूल अर्पित किए गए।
साहित्यकार प्रेम विज ने काव्यांजलि भेंट की। विद्या धाम की अध्यक्ष डॉ. सरिता मेहता ने गांधीजी को अपनी कविता से श्रद्धांजलि दी। पंडित मोहनलाल एसडी पब्लिक स्कूल सेक्टर-32 के बच्चों एवं संगीत शिक्षक नीलम शर्मा ने गांधीजी के प्रिय भजनों को मधुर आवाज में प्रस्तुत किया। त्यागी ने कहा कि गांधीजी ने कहा था कि कार्य क्षेत्र व संस्कृति का ज्ञान, चरित्र निर्माण तथा कर्तव्य के प्रति जागरूकता होनी बहुत जरूरी है।
इस मौके पर खादी आश्रम सेक्टर-17 के सचिव संजय शर्मा, सतीश कुमार, अमर सिंह, योग गुरु नरेश शर्मा, शोभा शर्मा, धर्मपाल छौक्कर, आनंद राव, पापिया चक्रवर्ती, गुरप्रीत, अमित कुमार, विक्की, महेंद्र सिंह पंजाब खादी मंडल के कई कार्यकर्ताओं आदि ने बढ़चढ़कर भाग लिया।
महात्मा गांधी का संदेश सदैव प्रासंगिक: जैन
मुख्यातिथि सत्यपाल जैन ने महात्मा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि गांधी का संदेश सदैव प्रासंगिक है। हमें गांधीजी की विचारधारा को लेकर गलत टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। हर स्वतंत्रता सेनानी एवं देशभक्तों का अलग-अलग तरह से आजादी के आंदोलन में योगदान रहा। यहां पर तो हर एक विचारधारा की स्वतंत्रता है। हमें इन महापुरुषों की विशेषताओं को याद करना चाहिए। उनके महत्व को देखते हुए हमें उनके रास्ते पर चलने का संकल्प करना चाहिए।