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अक्षय तृतीयाः जानिए, आज कैसे करें पूजन

Fri, 02 May 2014 08:51 AM IST
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अक्षय तृतीया पर हल्दी सभी कष्टों से दूर करेगी। यह दांपत्य जीवन की मजबूती का बेहतर मौका भी है। गौरी का पूजन करने से अपनों का भरपूर प्यार बरसेगा। यह कहना है सेक्टर-30 स्थित श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र और सुशील कौशल का।
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मिश्र का कहना है कि दो मई दिन शुक्रवार को रोहिणी नक्षत्र वैशाख मास शुक्ल पक्ष तृतीया का अक्षय तृतीया कहते हैं। उन्होंने कहा कि दिन शुक्रवार और रोहिणी नक्षत्र हो तो इसका महत्व और अधिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि इस दिन को स्वयं सिद्ध मुहूर्त कहा जाता है।

गृह प्रवेश, व्यापार और विद्या का प्रारंभ और विवाह का बिना विचार किए करने का विधान है। जमीन खरीदना बेचना, सोना चांदी का बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ है।

सेक्टर-15 के जय श्रीराम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र का कहना है कि इस दिन तीर्थ में स्नान करने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराकर जल से भरा हुआ कलश, जूता, चप्पल छाता, गौभूमि, सोना चांदी का दान मंदिर में या ब्राह्मण को दान करना बहुत ही शुभ है।
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सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे का कहना है कि जो व्यक्ति किसी कारणवश तीर्थ स्नान के लिए नहीं जा सकते वे गंगाजल में तिल डालकर स्नान करें। जिस कन्या के विवाह होने में बाधा है या दांपत्य जीवन में क्लेश के कारण दांपत्य जीवन अच्छा नहीं है तो गौरी का पूजन मिट्टी के कलश में जल, पीला फूल, तिल और हल्दी का दान करें।

देवालय पूजक परिषद के संरक्षक और सेक्टर-38 के श्री सनातन धर्म मंदिर के प्रमुख पुजारी उमाशंकर पांडेय का कहना है कि इस वर्ष अक्षय तृतीया को रोहिणी नक्षत्र और मिथुन राशि का बृहस्पति होने के कारण और यह पर्व भगवान विष्णु के होने के कारण हल्दी का दान अवश्य करनी चाहिए।

हल्दी की माला या हल्दी का टुकड़ा पीला धागा में बांधकर अवश्य पहने। इसके धारण करने से विद्या में उन्नति, विवाह शीघ्र होगा और दाम्पत्य जीवन सुखमय होगा। हल्दी धारण करने से आर्थिक और मानसिक क्लेश दूर हो जाते हैं। यह इसलिए कि हल्दी भगवान विष्णु का बहुत ही प्रिय है और इसीदिन भगवान बद्रीनाथ का पट खुलता है।

कुंडली में पितृदोष पर ये करें
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के प्रमुख पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि जिसकी कुंडली में पितृ दोष हो तो मृत पितरों का तिल से तर्पण, जल दूध से तर्पण और पितृ गायत्री से हवन कराने के बाद जौ के आटा से यदि पिंडदान करें तो वह उसके पितर शांत हो जाते हैं। किसी कारणवश तर्पण एवं पिंडदान न हो सके तो हल्दी और पीला या श्वेत वस्त्र देने से पितर शांत हो जाते है। अक्षय तृतीया को हल्दी दान का बहुत ही शुभ माना गया है।

राहुकाल में दान न करें
सेक्टर-8 के प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी अयोध्या प्रसाद ने बताया कि दो मई अक्षय तृतीया को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजे तक राहु काल है। राहु काल में दान और शुभ कार्य करने की मनाही है।
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