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Chandigarh News: फर्जी हिट एंड रन के 16 साल पुराने केस में दो पुलिसकर्मियों को राहत

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चंडीगढ़। सत्र न्यायालय ने 16 साल पुराने फर्जी हिट एंड रन मामले में दो पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत देते हुए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की ओर से सुनाई गई सजा के फैसले को पलट दिया। इस मामले में सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर हरभजन सिंह और कांस्टेबल विजय कुमार ने पिछले साल सुनाए गए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। अदालत ने हरभजन को दो साल और विजय को एक साल की सजाई थी। सत्र न्यायालय ने दोनों की अपील को स्वीकार करते हुए उनकी सजा को खत्म कर केस को दोबारा सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेज दिया है।
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हरभजन के वकील हरीश भारद्वाज ने बताया कि मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों को गवाहों के क्रॉस एग्जामिनेशन का मौका नहीं दिया गया, इसलिए अदालत ने केस को फिर मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेज दिया है। इस पर 30 अक्तूबर से सुनवाई शुरू होगी। तब तक उनकी सजा को खत्म कर दिया गया है।

ये था मामला... पुलिसकर्मियों हरभजन सिंह और विजय कुमार के खिलाफ अधिवक्ता गुरपाल सिंह बैंस ने अदालत में केस दायर किया था। गुरपाल सिंह बैंस ने याचिका में बताया था कि 3 जून 2006 को सेक्टर-26 थाना पुलिस ने बापूधाम में एक हिट एंड रन केस में उनके खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। इसमें आरोप था कि वह मारुति कार से बापूधाम में एक व्यक्ति को टक्कर मार फरार हो गए। पुलिस ने अदालत में उनके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया, जबकि चार्जशीट में घटना की जो तारीख दिखाई थी, उस दिन उनकी कार मलोया थाना पुलिस ने कब्जे में ले रखी थी। दरअसल, उनकी गाड़ी खराब हो गई थी जिसे वे मलोया में छोड़कर चले गए थे, जिसे पुलिस उठाकर ले गई थी। इस एफआईआर के खिलाफ बैंस पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट भी गए। हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए एसआईटी बनाई गई। इसमें सच्चाई सामने आने के बाद साल 2008 में उन्हें बरी कर दिया गया। अदालत से बरी होने के बाद उन्होंने गलत केस दर्ज कर गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दायर कर दिया था। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट भरत की कोर्ट ने सुनवाई के बाद बीते साल दोनों पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई थी। इस सजा के फैसले के खिलाफ दोनों पुलिसकर्मियों ने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की।
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