चंडीगढ़। सेक्टर 17 के टीएस सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी में शनिवार को अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था ने सीमा गुप्ता के नए काव्य-संग्रह प्रेम में ही संभव है दिगंबर का विमोचन किया। विमोचन के बाद चर्चा का आयोजन हुआ। हरियाणा उर्दू अकादमी के प्रमुख डॉ चंद्र त्रिखा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ कुलदीप चंद अग्निहोत्री रहे। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन विजय कपूर ने किया।
काव्य संग्रह पर साहित्यकार और शिक्षा विद डॉ अश्वनी शांडिल्य ने कहा कि यह अंतर्मन की यात्रा में पीड़ा के रास्ते असंभव को संभव बनाने की प्रक्रिया की कविताएं हैं। विजय कपूर ने कहा कि सीमा का काव्य अमूर्त आध्यात्मिक विचारों को काव्यात्मक सुलभता से हृदयस्पर्शी बनाता है। भाषिक सरलता और मार्मिकता लिए, गहनतम सत्य की अभिव्यक्ति यह काव्य-संग्रह है।
साहित्यकार डॉ विमल कालिया ने कहा कि यह काव्य संग्रह बहुत कुछ खोकर बहुत कुछ पाने की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है। डॉ चंद्र त्रिखा ने कहा कि सीमा की कविताएं मानव मन की मौलिक जिज्ञासाओं को छू कर अध्यात्म की ओर बढ़ती हैं। डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने इस संग्रह के बारे में कहा कि इसमें आत्मा की यात्रा, नश्वरता और परम सत्ता के अनुभव के चिंतन का चित्रण है।
सीमा गुप्ता ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और उससे उपजी इस कृति के बारे में बात करते हुए कहा कि यह यात्रा आत्मशुद्धि और निराकार को आकार देने की आध्यात्मिक अनुभव की अद्भुत यात्रा रही है।
अभिव्यक्ति की मासिक गोष्ठी
काव्य संग्रह के विमोचन और परिचर्चा के उपरांत अभिव्यक्ति की मासिक गोष्ठी का आयोजन हुआ। आरके सुखन ने थी बेकरारी फिर भी मुझको करार था, खुशबू हवा में थी मैं गुलशन का खार था पर वाहवाही के साथ तालियां बटोरीं। विजय कपूर ने अपनी कविता के माध्यम से लोकतंत्र की विडंबना पर गहरा व्यंग्य किया। सीमा गुप्ता ने सच कहा अक्का, पीड़ा का घर है मन पेश किया। अमरजीत अमर हजारों साल जिस पुल को बनाने में लगे हैं,उसे कुछ लोग मिलकर क्यों गिराने में लगे हैं पेश किया। अश्वनी मल्होत्रा भीम ने जहां राम हो वहां काम नहीं, जहां काम हो, हो कैसे राम वहां पेश किया। इसके अलावा ममता ग्रोवर, बीबी शर्मा डॉ. नीरू मित्तल नीर, कृष्णा गोयल, मोनिका कटारिया, खुशनूर, सुरेंद्र पाल सोनी, डॉ. नवीन गुप्ता सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं पेश की।