कोविड की दूसरी लहर के समय संविदीप ने सात वर्ष की आयु में कहानी लिखना शुरू किया। माैके पर पुस्तकालय के प्रभारी लाइब्रेरियन डॉ. परवीन कुमार ने कहा कि बच्चों को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है, इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होने के साथ उनकी रचनात्मकता विकसित होती है। संविदीप जैसी युवा लेखिका हमें प्रेरणा देती हैं कि सच्ची प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। कार्यक्रम का आयोजन बच्चों की सेक्शन प्रभारी दीक्षा ने किया।