सात आरोपियों को तीन साल की सजा
साल 2022 में फायरमैन की भर्ती के लिए फिजिकल टेस्ट हुआ था, जिसमें पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कर 7 लोगों को गिरफ्तार किया था। जिसमें 4 आरोपी वो थे जो दूसरे की जगह पर फिजिकट टेस्ट देने आए थे। जबकि तीन आरोपी वो थे जो असली अभ्यार्थी थे। इस मामले में अदालत ने 7 आरोपियों को तीन तीन साल की सजा सुनाई थी।
रिकॉर्ड मंगवाया, लेकिन आगे जांच नहीं बढ़ी
पुलिस ने सभी फायरमैन के ज्वाइनिंग लैटर, ओएमआर शीट और अन्य दस्तावेज का ऑनलाइन रिकॉर्ड पुलिस के पास है। लेकिन इस मामले में जांच यही रूक गई थी। जबकि पुलिस को फिंगर प्रिंंट और दस्तावेज की जांच के लिए रिकॉर्ड को फि्लौर और सीएफएसल चाहिए था, लेकिन पुलिस ने नहीं भेजा। सीएफएस जांच से पता चल जाएगा कि ओएमआर शीट और ज्वाइनिंग लैटर पर किए गए दस्तावेज अलग अलग लोगों के हैं। वहीं फिंगर प्रिंट से भी साफ हो जाएगा कि परीक्षा देने वाला कौई और था और भर्ती होने वाला कोई और था। सूत्राें ने बताया कि इस मामले में जांच आगे बढ़ने का क कारण यह भी था कि जांच अधिकारी की ट्रांसफर हो गई थी। अब यह केस किसी दूसरे जांच अधिकारी के पास है। जिस कारण से जांच रूक गई थी। लेकिन अब पुलिस अधिकारी ने जांच तेज करने के आदेश दे दिए हैं।
सेक्टर 43 निवासी ने विजिलेंस जांच के लिए लिखा था पत्र
सेक्टर-43 निवासी नवीन कुमार ने फिजिकल टेस्ट से पहले ही मुख्य विजिलेंस अधिकारी को पत्र लिखकर फायर ब्रिगेड में भर्ती के लिए हुई लिखित परीक्षा पर भी सवाल उठाए थे उन्होंने पत्र में लिखा है कि पेपर सीलबंद लिफाफे में नहीं थे। स्टेपलर से लिफाफे को बंद किया गया था। अभ्यर्थियों की कोई जांच नहीं की जा रही थी। अभ्यर्थी मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर जा रहे थे। ओएमआर शीट भी तीन की जगह एक ही दी गई थी।