उन्होंने कहा कि मिलों की गारंटी के दस्तावेज गायब न हो सकें, इसलिए उन्हें स्कैन कर विभाग के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। ताकि दस्तावेज गायब होने की स्थिति में भी गारंटर पर कार्रवाई में कोई दिक्कत न आए। विभाग ने यह निर्णय कैथल के एक राइस मिलर के फरार होने पर लिया है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय से इस मिलर की गारंटी से संबंधित दस्तावेज भी गायब हैं। इसलिए अब गारंटी के दस्तावेजों को स्कैन कर रखा जाएगा। फरार मिलर ने सात करोड़ रुपये के धान घोटाले को अंजाम दिया है।
एसीएस ने एसपी कैथल को दिए एफआईआर के निर्देश
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कैथल ने सात दिन पहले ही पुलिस को फरार मिलर के खिलाफ केस दर्ज करने की शिकायत दे दी थी। पीके दास ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को कैथल के एसपी से बात की है। एसपी को फरार मिलर, उसके गारंटर व विभाग के उस कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके पास गारंटी के दस्तावेज फाइल में रखे हुए थे। उन्होंने कहा कि सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को राइस मिलर्स की गारंटी के दस्तावेज जांचने के निर्देश दिए हैं। अगर और जिलों में भी दस्तावेज गायब पाए जाते हैं तो वहां भी संबंधित कर्मचारियों, मिलर्स व गारंटर के खिलाफ केस दर्ज कराए जाएंगे।
1207 मिलों में 42589 मीट्रिक टन कम मिला है धान
हरियाणा की 1207 राइस मिलों ने 42589 मीट्रिक टन के धान घोटाले को अंजाम दिया है। खाद्य आपूर्ति विभाग की 300 जांच टीमों ने मिलों के भौतिक सत्यापन में इस घोटाले को पकड़ा है। 1304 राइस मिलों का जांच टीमों ने भौतिक सत्यापन किया, जिसमें से 1207 मिलों में 42589 मीट्रिक टन धान कम मिला। इससे सरकार को 90 करोड़ रुपये की चपत लगी है। राइस मिलर्स ने बिना धान खरीदे ही या तो सरकार से यह राशि प्राप्त कर ली या धान आगे ज्यादा दामों पर बेच दिया। 90 करोड़ रुपये घोटाले की राशि को सरकार राइस मिलर्स व उनके गारंटर से ब्याज सहित वसूलेगी।