पीजीआई चंडीगढ़ की इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट की ओपीडी ने नया रिकार्ड बना लिया है। वहीं भीड़ से निपटने के लिए एक ये समाधान किया जा सकता है। वीरवार को कुल 1180 मरीज पहुंचे, जो किसी भी ओपीडी में एक दिन में पहुंचे मरीजों की संख्या में सबसे ज्यादा रही है। मरीजों की भीड़ बढ़ने से बुधवार को ओपीडी रात आठ बजे तक चलती रही।
मरीजों के साथ डिपार्टमेंट के कंसलटेंट और सीनियर रेजिडेंट व स्टाफ भी डटे रहे। विभाग के डाक्टरों ने बताया कि आमतौर पर ओपीडी में 900 व हजार के करीब मरीज आते थे, लेकिन वीरवार को तो रिकार्ड तोड़ मरीज पहुंचे। इससे पहले कभी भी मरीजों को आंकड़ा का इतना नहीं पहुंचा।
डिपार्टमेंट से जुड़े डाक्टरों का कहना है कि भीड़ बढ़ने का एक कारण यह है कि लोगों में डायबिटीज व हार्मोन डिस्आर्डर के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। दूसरा प्राइवेट में इस मर्ज का इलाज काफी महंगा है, जिसकी वजह से मरीज पीजीआई को प्राथमिकता देते हैं।
हालांकि भीड़ से मरीजों के इलाज का इंतजार थोड़ा लंबा हो जाता है। इंडो के अलावा कुछ अन्य ओपीडी में भी काफी भीड़ होती है, लेकिन कभी उनका आंकड़ा 1200 तक नहीं पहुंचा। आई ओपीडी में भी करीब 900 पेशेंट पहुंचते हैं।
डाक्टरों पर बढ़ रहा है दबाव
पीजीआई में इलाज के लिए आने वाले मरीज
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जिस तरह से इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट में मरीजों का बोझ बढ़ रहा है, उस अनुपात में कंसलटेंट की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई है। डिपार्टमेंट में पांच कंसलटेंट हैं और दस रेजिडेंट हैं। यानी 1200 मरीजों के लिए सिर्फ 15 डाक्टर है।
इन मर्ज के सबसे ज्यादा पेशेंट
इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट में सबसे ज्यादा मरीज डायबिटीज और हार्मोन डिस्आर्डर के हैं। इसके अलावा थायराइड, मोटापा, इफर्टिलिटी और फ्रैक्चर के मरीज हैं। इनका इलाज प्राइवेट के मुकाबले पीजीआई में काफी सस्ता है। दूसरी तरफ स्पेशलिस्ट डाक्टरों की संख्या भी कम है। पीजीआई में डिपार्टमेंट की तीन दिन ओपीडी होती है। तीनों दिन मरीजों की बंपर भीड़ होती है।
ये हो सकता है समाधान
भीड़ से निपटने के लिए पहले कंसलटेंट की संख्या बढ़ानी होगी। इसके अलावा ओपीडी के डे भी बढ़ाने होंगे, ताकि मरीजों की संख्या को कंट्रोल किया जा सके। इससे डाक्टर और मरीजों दोनों का समय बचेगा।
हमारी ओपीडी में इससे ज्यादा मरीज पहले कभी नहीं आए। आमतौर पर हजार तक आंकड़ा पहुंचता था, लेकिन बुधवार को तो सारे रिकार्ड टूट गए। भीड़ बढ़ना बताता है कि मरीजों में मर्ज के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। इस बारे में पीजीआई प्रशासन को पत्र लिखकर डाक्टरों की संख्या में इजाफा करने की मांग की है।
- डा. अनिल भंसाली, एचओडी इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट पीजीआई